नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। भौतिकी विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “Photonics and Emerging Materials for Futuristic Technology (PEMFT-2025)” का भव्य एवं गरिमामय उद्घाटन विश्वविद्यालय परिसर में सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन डीएसआईआर, डीआरडीओ, बीआरएनएस-DAE, ANRF तथा IRTEC-RIGAKU जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रायोजित है।
तीन दिवसीय सम्मेलन (13–15 नवंबर 2025) में अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, सर्बिया, पुर्तगाल, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, एसएसपीएल,डीआरडीओ, विभिन्न आईआईटी, एनआईटी, तथा देश-विदेश के प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों से आए प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद् भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन में फोटॉनिक्स, इमर्जिंग मैटेरियल्स तथा भविष्य की प्रौद्योगिकियों से संबंधित अत्याधुनिक शोध एवं नवाचारों पर विचार-विमर्श होना है।
उद्घाटन समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मंच पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला (मुख्य संरक्षक), डॉ. परिमल कुमार (मुख्य अतिथि), डॉ. मीना मिश्रा, निदेशक, एसएसपीएल, नई दिल्ली (विशिष्ट अतिथि), डॉ. विपिन चंद्र शुक्ला, डीएसआईआर, नई दिल्ली (विशिष्ट अतिथि), प्रो. अड्रोजा, प्रो. मृदुल गुप्ता, प्रो. बीरपाल सिंह, प्रो. अनिल कुमार मलिक, डॉ. नीरज पंवार तथा डॉ. योगेंद्र के. गौतम शामिल रहे।
स्वागत संबोधन में विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन के आयोजक प्रो. अनिल कुमार मलिक ने सभी अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए फोटॉनिक्स तथा इमर्जिंग मैटेरियल्स की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दूरसंचार, क्वांटम विज्ञान, सेंसिंग प्रौद्योगिकी और सतत विकास के संदर्भ में इन क्षेत्रों की तीव्र प्रगति का उल्लेख किया । विभाग को निरंतर प्राप्त हो रहे माननीय कुलपति के शैक्षणिक एवं अवसंरचनात्मक सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि डॉ. परिमल कुमार, वैज्ञानिक सलाहकार (CISC), रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, ने अपने विद्वतापूर्ण संबोधन में रक्षा एवं सामरिक प्रणालियों में फोटॉनिक्स एवं इमर्जिंग मैटेरियल्स के बढ़ते महत्व पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट, प्रोग्रामेबल नैनो-ऑप्टिक्स, मेटामटेरियल-आधारित स्टेल्थ प्रौद्योगिकी, नेक्स्ट-जेनरेशन सेंसर, पनडुब्बी संचार प्रणालियाँ तथा एयरोस्पेस फाइबर-ऑप्टिक मॉनिटरिंग जैसे अत्याधुनिक अनुप्रयोगों का उल्लेख किया।
उन्होंने पेरोव्स्काइट, क्वांटम-डॉट्स एवं द्वि आयामी पदार्थों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा प्रणालियों में आ रहे तकनीकी परिवर्तन को भी रेखांकित किया। डॉ. कुमार ने विद्यार्थियों से ग्रोथ माइंडसेट अपनाने का आह्वान करते हुए विश्वविद्यालयों को डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने “knowledge to wealth” की अवधारणा प्रस्तुत की तथा सीसीएसयू की औद्योगिक-भौगोलिक स्थिति को क्षेत्रीय नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को रेखांकित किया।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने "21वीं सदी को फोटॉन की सदी” कहा। उन्होंने दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, नैनो-इंजीनियरिंग तथा आधुनिक प्रौद्योगिकियों में फोटॉनिक्स की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, प्रयोगधर्मिता तथा अंतरविषयी अनुसंधान की ओर उन्मुख होने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि “ *विश्व-व्यवस्था को गति प्रदान करने वाली सर्वोच्च शक्ति ज्ञान की शक्ति है* ।”
सह-संरक्षक प्रो. बीरपाल सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों—NAAC A++ (3.66 CGPA), NIRF, SIMAGO और STEM रैंकिंग में शीर्ष स्थिति, ₹100 करोड़ से अधिक के शोध अनुदान, बढ़ते पेटेंट एवं SDG-2030 तथा विकसित भारत 2047 के अनुरूप कार्यक्रमों—का विस्तृत उल्लेख किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. विपिन चंद्र शुक्ला ने डीएसआईआर द्वारा एमएसएमई, स्टार्टअप तथा उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने हेतु संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए अमेरिका, जर्मनी, इस्राइल एवं सिंगापुर के नवाचार-मॉडलों का उदाहरण प्रस्तुत किया।
डॉ. मीना मिश्रा ने सीसीएसयू की शैक्षणिक प्रगति की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को “ *4 Cs—क्यूरोसिटी, कमिटमेंट, क्लैरिटी और कंसिस्टेंसी* ” अपनाने तथा असफलता के भय को त्यागकर सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं वैज्ञानिक नवाचार में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान एब्स्ट्रैक्ट बुक का विमोचन किया गया, जिसमें देश-विदेश के 180 से अधिक विद्वानों के शोध-सार शामिल हैं। सम्मेलन में कुल 67 आमंत्रित व्याख्यान, 30 मौखिक प्रस्तुतियाँ, 80 पोस्टर प्रस्तुतियाँ तथा आठ समानांतर तकनीकी सत्रों में 30 विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख विषयों में फोटोनिक क्रिस्टल, मेटामटेरियल्स, सेमीकंडक्टर, सुपरकैपेसिटर, हाइड्रोजन उत्पादन, क्वांटम प्रौद्योगिकी, नैनोफोटॉनिक्स तथा उभरती सामग्रियों पर नवीनतम शोध शामिल हैं।
उद्घाटन सत्र का संचालन प्रो. कविता शर्मा ने किया। समारोह में प्रो. अनुज कुमार (सह-संयोजक), प्रो. संजीव कुमार शर्मा (सह-संयोजक), डॉ. अनिल कुमार यादव (संयुक्त सचिव), डॉ. विवेक नौटियाल (संयुक्त सचिव), डॉ. रवि कुमार, डॉ. डी. एस. रावल सहित अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता दर्ज की।
अंत में डॉ. नीरज पंवार (मुख्य सचिव) ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रायोजक संस्थाओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार प्रकट किया।
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