नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद् एवं तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल, चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जीवन मूल्य एवं योगदान” पर आधारित एक विशेष वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। यह आयोजन अटल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय परिवार के प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
इस अवसर पर साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद् के समन्वयक प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे आदर्श पुरुष थे जिन्होंने सिद्धांतों को सर्वोपरि रखा। वे विचार और कर्म, दोनों स्तरों पर स्वच्छता के प्रतीक थे। सत्ता में रहते हुए भी उन्होंने दल और देश के बीच कभी भेद नहीं किया। उनके लिए राष्ट्रहित सर्वोच्च था। उनके भाषणों में जितनी मधुरता थी, उनके आचरण में उतनी ही सादगी और दृढ़ता झलकती थी। उन्होंने आगे कहा कि अटल जी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है “आज जब राजनीति में मूल्य और मर्यादाएँ खोती जा रही हैं, तब अटल जी का व्यक्तित्व हमें यह सिखाता है कि नीति, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम से ही सच्चा नेतृत्व संभव है।”
वरिष्ठ पत्रकार संतोष शुक्ला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “अटल बिहारी वाजपेयी केवल राजनेता नहीं, बल्कि कवि, चिंतक और मानवता के पुजारी थे। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी सशक्त पहचान बनाई और राष्ट्रहित के मुद्दों को सदैव प्राथमिकता दी। उनके भाषणों में पत्रकारिता की सजगता और कवि की संवेदना दोनों समाहित थीं। आज की पत्रकारिता को अटल जी से यह सीख लेनी चाहिए कि सत्य बोलना कठिन हो सकता है, परंतु वही वास्तविक पत्रकारिता है।”
वीनस शर्मा ने कहा कि “अटल जी ने राजनीति में सौहार्द्र, सहिष्णुता और संवाद की संस्कृति को जीवंत किया। वे विरोधियों के प्रति भी सम्मान का भाव रखते थे। उनके जीवन का सबसे बड़ा मूल्य ‘मतभेद नहीं, मनभेद’ की भावना थी। उन्होंने स्त्री सम्मान, शिक्षा, और राष्ट्रीय एकता के मुद्दों को सदैव प्राथमिकता दी।” उन्होंने कहा कि अटल जी की कविताएँ हमें यह सिखाती हैं कि शब्दों में कितनी शक्ति होती है—‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा’ जैसी पंक्तियाँ आज भी हर भारतीय के हृदय में ऊर्जा का संचार करती हैं।
जगत सिंह दोसा ने कहा कि “अटल बिहारी वाजपेयी जी का राजनीतिक जीवन पारदर्शिता और आदर्शवाद की मिसाल था। उन्होंने विपक्ष में रहकर भी राजनीति की गरिमा को बनाए रखा। वे भारतीय लोकतंत्र के ऐसे सिपाही थे जिन्होंने संवाद और सहमति के माध्यम से नीति निर्माण को सशक्त बनाया।”
उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को अटल जी के जीवन से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि राजनीति केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का साधन है। इस अवसर पर प्रोफेसर प्रशांत कुमार ने भी कहा कि “अटल जी का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, उन्होंने भारत की सांस्कृतिक आत्मा को विश्व पटल पर स्थापित किया। उन्होंने भारत की परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।” कार्यक्रम में डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव, डॉ. दीपिका वर्मा, डॉ. बीनम यादव, लव कुमार सहित तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल के अनेक शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
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