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Thursday, November 13, 2025

सुभारती विश्वविद्यालय में विविध शैक्षणिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन



शैक्षणिक सहयोग, राष्ट्रीय चेतना और दार्शनिक विमर्श पर केंद्रित रहे कार्यक्रम

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठः स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय ने हाल ही में विविध शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा के बहुआयामी स्वरूप को नई दिशा प्रदान की। विश्वविद्यालय में आयोजित तीन प्रमुख कार्यक्रमों—विधि संकाय एवं शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बीच हुए एम.ओ.यू. के अंतर्गत सत्र 2025-26 का प्रथम सत्र, “वंदे मातरम के 150 वर्षों पर जागरूकता प्रश्नोत्तरी” तथा “मीडिया और दर्शन” पर व्याख्यान—ने विद्यार्थियों में ज्ञान, मूल्य और देशभक्ति की भावना का समन्वय स्थापित किया।

विधि संकाय का पहला सत्र सफलतापूर्वक संपन्न
विधि संकाय, सुभारती विश्वविद्यालय और शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मध्य हुए परस्पर समझौता ज्ञापन के अंतर्गत सत्र 2025-26 का प्रथम शैक्षणिक सत्र विधिवत रूप से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में प्रोफेसर उषा साहनी ने ‘व्यक्तित्व विकास’ विषय पर प्रेरक व्याख्यान देते हुए कहा कि मानव जीवन अत्यंत मूल्यवान है, इसलिए इसे सार्थक बनाना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों के पालन पर बल दिया।
सत्र के समापन पर प्रोफेसर वैभव गोयल भारतीय ने कार्यक्रम का सार प्रस्तुत करते हुए सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि शैक्षणिक सहयोग के ऐसे अवसर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं। इस अवसर पर विधि संकाय के प्राध्यापकगण और विद्यार्थी सम्मानपूर्वक उपस्थित रहे।

“वंदे मातरम” के 150 वर्ष पर प्रश्नोत्तरी का आयोजन
शिक्षा विभाग द्वारा 13 नवम्बर 2025 को “वंदे मातरम के 150 वर्षों पर जागरूकता प्रश्नोत्तरी” का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और 16 (शांति, न्याय और सशक्त संस्थान) के अनुरूप था। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) इंदिरा सिंह और डीन प्रो. (डॉ.) संदीप कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य सहयोग माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा का रहा।

प्रश्नोत्तरी के दौरान प्रो. (डॉ.) अनोज राज ने वंदे मातरम की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. रीबा देवी, सहायक प्रोफेसर, ने किया।
82 से अधिक प्रतिभागियों ने इस प्रश्नोत्तरी में भाग लिया, जिसमें 20 बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से राष्ट्रगीत से जुड़ी जानकारी और उसके महत्व का मूल्यांकन किया गया। छात्रों ने गूगल फ़ॉर्म प्रतिक्रिया में इस कार्यक्रम को प्रेरणादायक व ज्ञानवर्धक बताया।
“मीडिया और दर्शन” पर व्याख्यान — नैतिकता और सामाजिक मूल्यों पर चर्चा
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ‘मीडिया और दर्शन’ विषय पर आयोजित अतिथि व्याख्यान में नई दिल्ली स्थित विवेकानंद इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़, जीजीएसआईपीयू के सहआचार्य डॉ. सुनील मिश्रा मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. आशुतोष वर्मा ने किया।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि “आज मीडिया केवल सूचना का साधन नहीं, बल्कि यह हमारे नैतिक सोच और सामाजिक मूल्यों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण है। प्लेटो से लेकर आधुनिक विचारकों तक मीडिया ने सत्य, तर्क और सत्ता की समझ को प्रभावित किया है।” उन्होंने सुझाव दिया कि मीडिया का दार्शनिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करना एक जिम्मेदार नागरिकता की पहचान है।

विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतेष चौधरी ने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को समकालीन चुनौतियों को दार्शनिक विवेक से समझने की प्रेरणा देती हैं। व्याख्यान के दौरान छात्रों ने मीडिया की नैतिकता, गलत सूचना और डिजिटल जिम्मेदारी के आयामों पर गहन चर्चा की। इस अवसर पर शिक्षकगण — डॉ. संतोष कुमार गौतम, डॉ. प्रीति सिंह, राम प्रकाश तिवारी और तरुण जैन उपस्थित रहे। इन सभी कार्यक्रमों ने सुभारती विश्वविद्यालय की उस शैक्षणिक दृष्टि को सशक्त बनाया, जो शिक्षा, संस्कार और समाज के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।

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