नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मयूर विहार स्थित प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी के आवास पर भागवत की फलप्रधान दूसरे दिन की कथा हुई। कथा में बताया कि एक ही बीज पहले अंकुरित होता है, फिर फूल व फल बनता है। तत्पश्चात कर्दम ऋषि व देवहूति की कथा, कपिलमुनि के जन्म की कथा, उनका देवहूति को सांख्ययोग का उपदेश, नौ पुत्रियों का विवाह बताया गया।
कथा में बताया गया कि दक्ष प्रजापति द्वारा भगवान शिव को श्राप देना, दक्ष का यज्ञ करना व सती का उसमें बिन बुलाए सम्मिलित होना। दक्ष द्वारा शिव को अपमानित किए जाने पर सती का आत्मदाह व शिव भगवान द्वारा यज्ञ को विध्वंस करना। इसके अतिरिक्त आज दत्तात्रेय, सोम, राजा उत्तानपाद, रानी सुरुचि व सुनीति की कथा, ध्रुव द्वारा तपस्या के लिए जाना, भगवान का उन्हें वरदान देना, राजा वेन, भरत व पृथु की कथा, प्रचेताओं व प्रियव्रत की कथा, इन्होंने पृथ्वी को सात भागों में बांटा, ऋषभदेव की कथा, कुटकाचल में उनका तपस्या करना व देहत्याग आदि की कथाएं हुईं। रविवार को समुद्रमंथन की कथा, हिरण्यकशिपु, प्रहलाद व बलि आदि की कथाएं होंगी।
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