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Wednesday, May 13, 2026

खुशफहमी


नित्य संदेश 

 ​खुशफहमी

बेकरार होकर भी एक करार सा दिल में था।

नादान था जिसे उसका इंतज़ार आज भी था।


​ख्वाबों में कभी रुखसार पे पर्दा न था।

रूबरू होकर हमें वो पहचानता न था।


​आब-ए-दीद ने अरुण उन्हें मोती बनाया था।

उसके अश्क से महंगा वहां कोई और न था।


​थी ये खुशफहमी कि बस हम थे उनकी नज़रों का मरकज़।

आज यकीन आया हमसा कोई खुशफहम इस ज़माने में न था।​



— अरुण कैलाशनाथ चतुर्वेदी

लेखक व व्यवसायी

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