नित्य संदेश। दीपावली, गोवर्धन और भाई दूज – ये हमारे देश के सबसे पवित्र और आनंदमय त्योहार हैं। लेकिन आज इन पर्वों की पारंपरिक मिठास के साथ-साथ एक खतरनाक मिठास भी घुल चुकी है — केमिकल से बनी मिठाइयाँ, जो धीरे-धीरे हमारे शरीर में जहर बनकर प्रवेश कर रही हैं।
आज हमारे समाज में लीवर और किडनी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह संयोग नहीं है, बल्कि हमारी खान-पान की आदतों और बाजार की चमक-दमक का सीधा परिणाम है।
याद रखें — लीवर और किडनी ही शरीर से विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने का काम करते हैं। जब हम लगातार मिलावटी, केमिकलयुक्त, या नकली उत्पादों का सेवन करते हैं, तो यही अंग सबसे पहले क्षतिग्रस्त होते हैं।
आज देश में दूध का प्राकृतिक उत्पादन घट रहा है, लेकिन बाजार में दूध और दूध से बने उत्पादों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यह कैसे संभव है?
इसका उत्तर है — केमिकल से तैयार नकली दूध और पनीर।
बाजार में बिकने वाला अधिकांश पनीर यूरिया, डिटर्जेंट और सिंथेटिक फैट्स से तैयार किया जा रहा है। यही पनीर आज हमारे युवा देर रात होटलों और ढाबों में फेवरेट डिश के रूप में खा रहे हैं — बिना यह जाने कि यह स्वाद उनकी सेहत के लिए ज़हर बन रहा है।
बड़ी-बड़ी दुकानों में देसी घी के नाम पर बिक रही महंगी मिठाइयाँ भी अक्सर केमिकल से बने तेल और कृत्रिम स्वाद से तैयार की जाती हैं। ये देखने में आकर्षक जरूर लगती हैं, पर अंदर से हमारे शरीर के लिए बेहद हानिकारक हैं।
अगर हमें सच में स्वस्थ रहना है, तो हमें अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करना होगा।
* दूध और दूध से बने नकली उत्पादों से दूरी बनाएं।
* त्योहारों को फलों और प्राकृतिक आहार के साथ मनाएं।
* घर पर बनी सादी, शुद्ध और पौष्टिक चीज़ों को प्राथमिकता दें।
* बच्चों को रंग-बिरंगी मिठाइयों की जगह फ्रूट्स और ड्राई फ्रूट्स का स्वाद सिखाएं।
इस दीपावली, आइए एक नया संकल्प लें —
हम बड़ी-बड़ी दुकानों की महंगी, रंग-बिरंगी मिठाई नहीं खाएंगे, क्योंकि अब हमें पता है — वह मिठास नहीं, जहर है।
सच्ची मिठास वही है जो तन और मन दोनों को स्वस्थ रखे।
प्रस्तुति
प्रोफेसर (डॉ.) अनिल नौसरान
वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट
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