नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मयूर विहार स्थित प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी के आवास पर भागवत की फलप्रधान पहले दिन की कथा हुई। कथा में सौभरि ऋषि नें ब्रह्माजी से पूछा, जब कुछ भी नहीं था, तब आपने किस सृष्टि की याद करके पुनः सृष्टि की?
जैसे-जैसे ब्रह्माजी को याद आता रहा, वैसे-वैसे वे सृष्टि करते रहे। ब्रह्माजी के ढूंढने पर भी उन्हें सृष्टि के आदि और अंत का पता नहीं चला। शिव भगवान नें ब्रह्माजी से कहा कि इस सृष्टि का ना कोई आदि है ना अंत। इसके बीज या अंकुर का पता नहीं है। हम सभी इसके फल हैं। कथा में राम व हनुमान का संवाद, राजा परीक्षित व शुकदेव का वृत्तान्त, युधिष्ठर के राज्य के फल का वर्णन, यदि राजा प्रजापालक हो तो सभी कुछ सुचारु रुप से होता है।
दुर्योधन व पांडवों का वृत्तान्त, राजा परीक्षित की कथा, कलियुग का आगमन, हिरण्याक्ष और सूकर भगवान का सत्ताईस दिनों का युद्ध वर्णन, हिरण्याक्ष का वध व सभी देवताओं का प्रसन्न होना। शनिवार को कर्दम, ऋषभ व भरत आदि की कथाएं होंगी।
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