Breaking

Your Ads Here

Tuesday, September 16, 2025

आत्महत्या करने के बाद केवल व्यक्ति ही नहीं जाता, बल्कि पूरा का पूरा परिवार और समाज कलंकित होता है: नीतू सैनी

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। मुख्य छात्रावास अधीक्षक (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मनोविज्ञान विभाग एवं मानसिक स्वास्थ्य मिशन इंडिया) के सहयोग से "आत्महत्या रोकथाम चेतावनी संकेतों की समझ और निवारक उपाय" विषय पर एक इंटरएक्टिव कार्यशाला का आयोजन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम छात्रावास सीसीएसयू परिसर में किया गया। 

यह कार्यशाला विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर संस्था द्वारा मनाए जा रहे विश्व सुसाइड प्रिवेंशन वीक –2025 के अंतर्गत आयोजित की गई। जिसका उद्देश्य छात्रावास में रह रहे छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और आत्महत्या के संभावित चेतावनी संकेतों की पहचान करना था। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में आर सी आई लाइसेन्ड साइकोलॉजिस्ट नीतू सैनी रहीं, जिन्होंने बताया कि आत्महत्या करने के बाद केवल व्यक्ति ही नहीं जाता, बल्कि पूरा का पूरा परिवार और समाज कलंकित होता है। आत्महत्या करके व्यक्ति सोचता है के उसको दर्द से छुटकारा मिल गया जबकि वो पूरे समाज को एक ऐसा उदाहरण देके जाता है कि जो मानवता को कलंकित करता है इसलिए कभी यदि किसी को रात में नींद न आए, निराशा महसूस हो, नशे का सेवन करने का मन करे, खाने का पैटर्न बदल जाए, खुद को कमरे में बंद करने लगे, या सुसाइड के विचार आने लगें तो उनको मनोवैज्ञानिक सलाह लेनी चाहिए। 
कार्यक्रम में दूसरे वक्ता आरसीआई पंजीकृत मनोवैज्ञानिक एवं विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व काउंसलिंग सेंटर में मनोवैज्ञानिक के रूप में सहयोग कर रहे प्रो. संजय कुमार ने बताया कि जिंदगी बहुत खूबसूरत है जोकि खुश रहने के लिए है न कि खुद को दुखी करने के लिए। इसलिए जितना हो सके उतना खुश रहें और आस पास सबको खुश रखें। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और सुसाइड से संबंधी एनसीआरबी से प्राप्त आंकड़े काफी डरावने हैं इसलिए हमें उनसे संबंधित बातों के लिए हमें जागरूक होना आवश्यक है ताकि स्वयं की हे नहीं बल्कि आस पास भी लोगों की जिंदगी बचा सके क्यों कि हर एक जिंदगी कीमती है। उनके अनुसार, वर्ष 2022 के एक आंकड़े के अनुसार आज हर दिन लगभग 35 छात्र सुसाइड से अपनी जिंदगी खो देते हैं इसलिए हमें इस पर बात करना जरूरी है। 

उन्होंने कहा कि जीवन में समस्याएं तो आएंगी, लेकिन उनका समाधान भी होता है पर हम उनके समाधान अपने दोस्तों के बजाय बड़ों के साथ मिलकर निकालें तो हमें अवश्य समाधान मिल सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य की किसी भी स्थिति में आप अगर खुद को अकेला महसूस करें तो मानिए आप अकेले नहीं हैं। अगर किसी को बार-बार सुसाइड के विचार आते हैं और किसी बजह से पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो वे विश्वविद्यालय के साइकोलॉजिकल काउंसलिंग सेंटर में निःशुल्क संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर न्यूज एंड इवेंट सेक्शन में 9 सितंबर को डाले गए लिंक से सुसाइड के विचारों और डिप्रेशन का मापन भी कर सकते है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्ट्रेस मैनेजमेंट की प्रतिष्ठित विधि रिलेक्सेशन तकनीकी सिखाई।

कार्यक्रम में मुख्य छात्रावास अधीक्षक प्रो0 दिनेश कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कार्यक्रम विद्यार्थियों की जिंदगी को कई तरीके से नए आयाम दे सकते हैं इसलिए हमें इनमें भागीदारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी जिंदगी के हर फेस में परेशानियां तो आएंगी ही पर हमें हर बार नए तरीके से परेशानियों से बाहर निकलने के तरीके खोजने चाहिए। छात्रावास अधीक्षक इंजीनियर प्रवीण कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए हमें परिस्थिति और मनःस्थिति के बीच सामंजस्य बिठा के रखना चाहिए तभी हम खुश रह सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन एमएचएम इंडिया की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट प्रिया पाल और सोफिया ने किया। कार्यक्रम में सहायक छात्रावास अधीक्षक डा० लक्ष्मी शंकर सिंह , डा० गौरव त्यागी, विजय कुमार राम, और कार्यालय सहायक श्री मनी सिंह, भवेंद्र, मुन्नी, इमरान, सबलू कुमार, मनोज पंत सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान छात्रावास में रह रहे सभी विद्यार्थी कार्यक्रम में भागीदारी की।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here