Breaking

Your Ads Here

Monday, March 17, 2025

शाही ईदगाह कमेटी करेगी निर्णय, कौन पढ़ाएगा ईद की नमाज?



नित्य संदेश। पूर्व शहर काजी जैनुल साजिद्दीन की वफात के बाद गद्दी को लेकर छिड़ा संग्राम शुक्रवार तक काफी सुर्खियों में रहा। ‘नित्य संदेश’ हर हलचल की खबर पाठकों तक पहुंचाता रहा, कुर्सी सियासत में फंस गई, इसका खुलासा भी नित्य संदेश ने किया। ईद की नमाज कौन पढ़ाएगा? इसका सवाल भी सबसे पहले नित्य संदेश ने पूछा। इस पूरे घमासान में नित्य संदेश ने पहले ही कह दिया था कि शहर काजी प्रोफेसर डा. जैनुल सालेकिन ही बने रहेंगे। क्योंकि उनके पास अवाम का बहुमत था। हालांकि, दोनों तरफ से ये कहा जा रहा है कि बहुमत उनके पास है और वे ही शहर काजी है।

अब बात करते है दूसरे शहर काजी कारी शफीकुर्रहमान को लेकर, विवाद उन्होंने पैदा किया या उनसे करवाया गया, यह एक प्रश्न है। शहर काजी बनना उनका ख्वाब रहा है, वे काबलियत भी रखते हैं, शाही ईदगाह में उनका संबोधन पूरी अवाम गौर से सुनती रही हैं, उन्होंने हमेशा समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा, वे 1990 का जिक्र करते हैं कि उनकी कुर्बानी से जैनुल साजिद्दीन शहर काजी बनें, लेकिन आज हालात 90 के दशक से जुदा है। अब अवाम की पहली पसंद प्रोफेसर डा. सालेकिन है और इसकी वजह है उनके पास दुनियावी तालीम होना, इसीलिए आवाम को उनसे काफी उम्मीदें हैं।



कारी शफीकुर्रहमान की माने तो सपा के एक कद्दावर नेता, जो सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे और वर्तमान में विधायक है, उनके कारण वे शहर काजी नहीं बन सके। 1990 हो 2025 इसी सपा विधायक ने रोड़ा बनने का काम किया। शहर काजी की कुर्सी को सियासत में बांट दिया। सपाइयों की माने तो कारी शफीक विद्रोह कर रहे हैं, उनके साथ सिर्फ उन्हीं की जाति के लोग है, अवाम नहीं। जिसके पास बहुमत होगा, वह शहर काजी होगा।



ये सत्य है कि जैनुल सालेकिन के पास बहुमत है, वर्तमान में जो मुस्लिमों के लीडर है उन्होंने सालेकिन को समर्थन दे दिया है। चाहे उसमें नाम विधायक शाहिद मंजूर का रहा हो या पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी का। हालांकि, अभी तक पूर्व सांसद शाहिद अखलाक किसी के साथ नहीं दिखे, सूत्रों की माने तो वे खुद को इस मामले से दूर रखना चाहते हैं।  

शुक्रवार को जुमे की नमाज से पूर्व कारी शफीक ने एक वीडियो जारी किया था और उसमें अपना दर्द बयान करते हुए सालेकिन को समर्थन देने की बात कह दी थी। तब से मामला शांत है। अब ये अमन पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ है या तूफान आने से पहले की शांति है, क्योंकि अब ईद ज्यादा दिन दूर नहीं है, फिर से वही सवाल खड़ा है कि ईद की नमाज कौन पढ़ाएगा और शाही ईदगाह में नमाज से पूर्व संबोधन कौन करेगा?

कौन पढ़ाएगा शाही ईदगाह में नमाज?

इस बारे में नायब शहर काजी जैनुल राशिद्दीन से बात हुई, तो उन्होंने कहा कि अलविदा जुमा के दिन इस पर निर्णय होगा। जैसा अवाम चाहेगी, वह माना जाएगा। क्योंकि अभी तो स्वागत व सम्मान समारोह किया जा रहा है तो इस पर विचार नहीं किया गया।

सूत्रों की माने तो फिलहाल कारी सलमान को लेकर सबकी सहमति है, क्योंकि शाही जामा मस्जिद में वे ही नमाज अदा कराते आए हैं। लेकिन फलावदा की शाही ईदगाह में कारी सलमान नमाज पढ़ाते हैं तो ये भी हो सकता है कि कोई नया नाम सामने आएगा, जो शाही ईदगाह में ईद उल फितर की नमाज अदा कराएगा।

शहर काजी कारी शफीकुर्रहमान का कहना है कि उनका संबोधन जैसे पहले होता आया है, वैसा ही होगा। रहा सवाल ईद की नमाज का तो इसका निर्णय शाही ईदगाह कमेटी करेगी। कमेटी जिसके पक्ष में सुनाएगी, वह माना जाएगा।

लेखक

लियाकत मंसूरी

संपादक

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here