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Monday, March 17, 2025

किडनी स्टोन: सही देखभाल और इलाज से राहत संभव

 



बिनीत कुमार राय

नित्य संदेश, ग्रेटर नोएडा किडनी स्टोन एक आम समस्या बनती जा रही है, जिसमें मिनरल्स और सॉल्ट के कठोर कण किडनी में इकट्ठे होकर तेज दर्द का कारण बनते हैं। यह समस्या भारत जैसे गर्म मौसम वाले देशों में अधिक देखने को मिलती है, जहां डिहाइड्रेशन इसका एक बड़ा कारण है। भारत में हर साल 20 लाख से अधिक लोग इस परेशानी से जूझते हैं, खासकर उत्तर भारत के राज्यों में जहां खान-पान स्टोन बनने की संभावना को बढ़ाते हैं।

यथार्थ हॉस्पिटल के यूरोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार बब्बर का कहना है, एक बड़ी चिंता की बात यह भी है कि लगभग 50% मरीजों में स्टोन बनने की समस्या पांच साल के भीतर दोबारा हो सकती है, जिससे बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है। बताया कि किडनी स्टोन होने पर दर्द और परेशानी को नजर अंदाज करना सही नहीं है। सही समय पर इलाज कराने से न सिर्फ दर्द से राहत मिलती है, बल्कि भविष्य में स्टोन बनने की संभावना भी कम हो जाती है। मरीजों को पानी की कमी से बचना चाहिए और खानपान में सही संतुलन रखना चाहिए, ताकि यह समस्या दोबारा न हो।"

कैसे बनता है स्टोन

स्टोन तब बनता है जब यूरिन में कैल्शियम, ऑक्सलेट और यूरिक एसिड अधिक मात्रा में इकट्ठे होकर क्रिस्टल बना लेते हैं। कम पानी पीने से यूरिन ज्यादा गाढ़ा हो जाता है, जिससे स्टोन बनने की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादा नमक और ऑक्सलेट से भरपूर चीजें जैसे पालक और ड्राय फ्रूट्स का अधिक सेवन, मोटापा और अनियमित जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, कुछ मेडिकल कंडीशन्स जैसे हाइपरपैराथायरायडिज्म और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर भी स्टोन बनने के खतरे को बढ़ाते हैं। इसलिए समय रहते इसका सही प्रबंधन करना जरूरी है।

किडनी स्टोन के मुख्य लक्षण

किडनी स्टोन के मुख्य लक्षण में पीठ, पेट या कमर में तेज दर्द शामिल है, जिसे अक्सर सबसे असहनीय दर्दों में गिना जाता है। इसके साथ यूरिन में खून, बार-बार पेशाब की इच्छा, जी मिचलाना, उल्टी और अगर संक्रमण हो जाए तो बुखार और ठंड लगना भी देखने को मिलता है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एक्स-रे जैसी इमेजिंग तकनीकों से स्टोन के साइज और लोकेशन का पता लगाते हैं।

किडनी स्टोन से बचाव

किडनी स्टोन से बचाव के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है, ताकि यूरिन पतला रहे। संतुलित खानपान (कम नमक और प्रोसेस्ड फूड्स, पर्याप्त कैल्शियम) के साथ-साथ नियमित एक्सरसाइज और वेट कंट्रोल भी मददगार हैं। जिन लोगों को पहले से स्टोन की समस्या हो चुकी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर नियमित जांच और डाइट में बदलाव करना चाहिए ताकि दोबारा स्टोन न बने।

इलाज

स्टोन के साइज और गंभीरता पर निर्भर करता है। छोटी स्टोन अक्सर ज्यादा पानी पीने और दर्द निवारक दवाओं से निकल जाती हैं, जबकि कुछ दवाएं स्टोन को घोलने या दोबारा बनने से रोक सकती हैं। बड़ी या लगातार बनी रहने वाली स्टोन के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है। उदाहरण के लिए, ईएसडब्ल्यूएल (एक्स्ट्राकॉरपोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी) में साउंड वेव्स से स्टोन को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, यूआरएस (यूरेटरोस्कोपी) में पतली ट्यूब और लेजर से स्टोन के टुकड़े किए जाते हैं, आरआईआरएस (रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी) से बिना ज्यादा नुकसान पहुंचाए स्टोन हटाया जाता है, और बहुत बड़े या जटिल स्टोन के मामलों में पीसीएनएल (पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी) तकनीक अपनाई जाती है।

क्यों बढ़ रही समस्या

किडनी स्टोन की समस्या भारत में लगातार बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतें हैं। इसलिए समय पर जांच, पर्याप्त पानी पीने, संतुलित आहार और एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही देखभाल और इलाज के जरिए इस समस्या से राहत पाई जा सकती है और भविष्य में स्टोन बनने से बचाव किया जा सकता है।

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