नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। ट्रांजैक्शन
कंसलटेंट की बीड डालने वाली कंपनियां कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट के दायरे में हैं। संघर्ष
समिति ने निजीकरण में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
विद्युत
कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर लगातार 110वें दिन जिला भर के बिजली कर्मचारियों
ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट
(हितों के टकराव) के प्राविधान को हटाकर निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट की बिडिंग
कराई गई है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों इं सीपी सिंह (सेवानिवृत), इं कृष्ण कुमार
साराश्वत, इं निशान्त त्यागी, इं प्रगति राजपूत, कपिल देव गौतम, जितेन्द्र कुमार, दिलमणि,
मांगेराम, दीपक कश्यप, प्रदीप दरोगा, भूपेंद्र, कासिफ आदि ने यहां कहा कि जानकारी मिली
है कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति हेतु अर्नेस्ट एंड यंग, ग्रैंड थ्रामटन और
डेलॉइट कम्पनी ने बीड डाली है। पारदर्शिता का तकाजा यह है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन
को स्पष्ट करना चाहिए कि यह तीनों कंपनियां बिजली के मामले में कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट
के दायरे में आती है या नहीं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे कई और मुद्दे हैं, जिससे
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के पीछे बहुत बड़ा भ्रष्टाचार
होने जा रहा है। जनपद मेरठ में ऊर्जा भवन कार्यालय में कार्यालय समय उपरांत हुई विरोध
सभा में सभी बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद की।
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