अरविंद कुमार सांगवान
नित्य संदेश, रोहटा। बुधवार को बजाज शुगर मिल किनोनी के पूठखास स्थित जोनल कार्यालय परिसर में बसंत कालीन गन्ने की बुवाई को लेकर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें गन्ना वैज्ञानिकों ने गोष्ठी में कहा कि भारत गन्ना उत्पादन ओर क्षेत्रफल में प्रथम स्थान पर है, लेकिन उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता अन्य राज्यों की अपेक्षा कम है। इसे बढ़ाने के लिए किसानों को गन्ने की स्वीकृत प्रजातियों की बुवाई ट्रेंच विधि से करने ओर ऑर्गेनिक खादों का प्रयोग करने पर बल दिया।
मुजफ्फरनगर
गन्ना किसान संस्थान से आए गन्ना वैज्ञानिक डॉक्टर एसपी सिंह ने गोष्ठी में
किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि काफी लंबे समय से किसान फसलों में यूरिया
डीएपी की भरमार कर रहा है। जिससे जमीन में सूक्ष्म तत्वों की कमी आ गई है। और जमीन
में एक ठोस परत बनती जा रही है। जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति घटती जा रही है। किसान
को कई गुना लागत लगाकर पैदावार लेनी पड़ रही है। जिला गन्ना अधिकारी डॉक्टर ब्रजेश
पटेल ने कहा कि शरद कालीन गन्ने की बुवाई के साथ साथ सहफसली खेती जैसे दाल दलहन, सरसों, लहसुन, आलू आदि की बुवाई करें और दोहरा लाभ ले।
किनोनी मिल के यूनिट हैड केपी सिंह ने फसल सुरक्षा के बारे में बताया कि किसान को
निरोगी गन्ना बीज उपलब्ध कर गन्ने की बुवाई करनी चाहिए। इसके
अलावा उन्होंने किसानों को फसलों में लगने वाले कीओं और बीमारियों
के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उनकी रोकथाम के उपाय बताएं।
मिल
के महाप्रबंधक गन्ना जयवीर सिंह ने कहा कि किसान को मृदा परीक्षण कराकर जमीन में
सूक्ष्म तत्वों जिंक, सल्फेट, मैग्निशियम, कैल्शियम,
पोटाश, बोरान आदि की मात्रा समानुपात में
डालकर संतुलन बनाना चाहिए। चीनी मिल के सहायक गन्ना विकास महाप्रबंधक आदेश तोमर ने
कहा कि अब किसानों के बसंत कालीन गन्ने की बुवाई करने का समय
आ गया है। किसानों को उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्वीकृत प्रजातियों के साथ साथ
ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करनी चाहिए। गोष्ठी का संचालन आदेश तोमर ने किया।
इस मौके पर उप महाप्रबंधक गन्ना महकार सिंह, गन्ना डायरेक्टर
रामवीर नेक, उप सभापति पीतम सिंह, राजीव
सिंह, विनोद, मांगेराम शर्मा, लीलू त्यागी, मनोज सिरोही, आशीष
त्यागी, दुष्यंत त्यागी, सुरेंद्र तोमर,
अमित देशवाल, सचिन सांगवान, मास्टर महक सिंह, बोबी, अजयवीर,
जसवीर सिंह आदि उपस्थित रहे।

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