शाही जामा मस्जिद पहुंचे थे कारी, माइक हाथ से छीना, नहीं होने दी तकरीर
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शुक्रवार को शाही जामा मस्जिद जंग का अखाड़ा बन गई, जैसे ही तकरीर के लिए कारी शफीकुर्रहमान खड़े हुए, लोगों ने उनके हाथ से माइक छीन लिया। धक्का मुक्की, अपशब्द कहें। दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। माहौल को देखते हुए कारी शफीक मस्जिद से बाहर चले गए। अपने बयान में कारी शफीक ने कहा कि गुंडों के दम पर कुछ लोग डा. सालेकिन को शहर काजी बनाना चाहते है, ऐसा नहीं होगा। दूसरी ओर, नायब शहर काजी एडवोकेट जैनुल राशिद्दीन ने कहा कि अवाम ने सालेकिन को शहर काजी चुन लिया है, कारी शफीक सिर्फ फितना फैला रहे हैं।
पूर्व शहर काजी प्रोफेसर जैनुल साजिद्दीन की वफात के बाद शहर काजी की कुर्सी को लेकर हंगामा मचा हुआ है। जनाजा उठने से पहले ही पूर्व मंत्री एवं सपा विधायक शाहिद मंजूर ने साजिद्दीन के पुत्र प्रोफेसर डा. जैनुल सालेकिन को नया शहर काजी स्वीकार करते हुए पगड़ी पहना दी। अगले दिन शहर कारी शफीकुर्रहमान ने इसका विरोध किया और कहा कि जिसके पास दीनी तालीम न हो, वह कतई शहर काजी स्वीकार नहीं किया जा सकता। दो दिन बाद कुछ लोगों ने एक कार्यक्रम करके शफीकुर्रहमान को शहर काजी चुन दिया। इसके बाद शहर में दो काजी हो गए। तभी से एक दूसरे के लोग दोनों को पगड़ी पहना रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व शाही जामा मस्जिद में जुमे की नमाज में कारी शफीक शरीक नहीं हुए थे। हालांकि, माहौल गर्माया हुआ था।
मौलाना खुर्शीद ने अदा कराई नमाज
शुक्रवार को जुमे की नमाज में कारी शफीकुर्रहमान शरीक हुए। वे अगली सफ में जाकर बैठे और उन्होंने तकरीर के लिए माइक मांगा। उस वक्त प्रेाफेसर डा. सालेकिन भी वहां मौजूद थे, लोगों ने कारी शफीक से कहा कि तकरीर के लिए सालेकिन से अनुमति ले लीजिए, जिसके लिए उन्होंने इंकार कर दिया। इसके बाद शांति पूर्वक जुमे की नमाज अदा हुई, जिसे मौलाना खुर्शीद ने अदा कराया। नमाज के बाद कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। कारी शफीक का आरोप है कि उनके साथ धक्का मुक्की की गई। भीड़ ने उनको घेर लिया और अपशब्दों का प्रयोग किया। जिससे माहौल ख़राब होने लगा। आरोप है कि इस धक्का मुक्की में वे गिर गए और घायल हो गए।
हरगिज़ क़ुबूल नहीं करूंगा सालेकिन को शहर काजी: कारी शफीक
कारी शफीक ने कहा कि गुंडों के दम पर सालेकिन खुद को शहर काज़ी कहलवाना चाहते हैं, जबकि नमाज़ तक पढ़ाने की सलाहियत नहीं है। किसी ओर से नमाज़ पढ़वा रहे हैं, जब खुद अह्ल नहीं है तो फ़िर टकराव के साथ गुंडागर्दी क्यूँ की जा रही है? या तो उन्हीं को काज़ी बना दो या ख़ुद हट जाओ। मैं किसी भी सूरत में सालेकिन को शहर काज़ी हरगिज़ क़ुबूल नहीं करूंगा।
तकरीर के लिए सालेकिन से लेनी होगी अनुमति: जैनुल राशिद्दीन
नायब शहर काजी एडवोकेट जैनुल राशिद्दीन का कहना है कि प्रोफेसर डा. जैनुल सालेकिन को अवाम ने शहर काजी चुन लिया है। कारी शफीक ने मानते तो ना माने। मस्जिद आने से उनको कोई नहीं रोक रहा, नमाज पढ़े, लेकिन तकरीर करने के लिए शहर काजी से अनुमति लेनी होगी। माहौल खराब कारी शफीक कर रहे हैं और फितना भी वहीं फैला रहे हैं।
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