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Monday, February 10, 2025

आयोडीन युक्त नमक के लाभ स्वाद से कहीं आगे की बात



नित्य संदेश ब्यूरो 
बिजनौर। आयोडीन युक्त नमक के फायदे सिर्फ स्वाद बढ़ाने से कहीं अधिक हैं। नमक एक आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट है, जो सेल्युलर फंक्शन (कोशिका प्रकार्य)के लिए बेहद ज़रूरी है। नमक को सोडियम क्लोराइड के नाम से भी जाना जाता है। नमक के महत्त्व को देखते हुए इसके प्रभाव को समझना और इसके लाभ के बीच एक नाज़ुक संतुलन ढूंढना ज़रूरी है। 

यह पहल दशकों से चल रही है, जिसके तहत सरकारी निकायों, गैर सरकारी संगठनों और शोध संस्थानों के बीच नमक के आयोडीनीकरण के ज़रियेदेश भर में आईडीडी को कम करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। राष्ट्र निर्माण कीदिशामें ऐसी ही एक महत्वपूर्ण साझेदारी टाटा साल्ट की रही है जोअग्रणी आयोडीन युक्त नमक ब्रांड के रूप में 1983 में अपनी स्थापना के बाद से आयोडीन की कमी सेजुड़े विकारों (आईडीडी) के खिलाफ देश केसंघर्षसे गहराई से जुड़ी हुई है।

भारत में नमक के आयोडीनीकरण से जुड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल 1950 के साथ दशक में शुरू हुई थी, जो आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों (आईडीडी) से निपटने के लिए आयोडीन को शामिल करने सेसंबंधित थी। हालांकि, 1960 के दशक में कांगड़ा घाटी परियोजना (हिमाचल प्रदेश) की सफलता ने सर्वत्र व्याप्त नमक आयोडीनीकरण (यूनिवर्सल साल्ट आयोडायज़ेशन-यूएसआई) और 1992 में इसके आधिकारिक लॉन्च की बुनियाद रखी। इस परियोजना ने साबित किया कि गॉयटर आयोडीन की कमी के कारण होता है। इस परियोजना से यह भी सामने आया कि पोटेशियम आयोडेट के इस्तेमाल से तैयार आयोडीन युक्त नमक सबसे प्रभावी और किफायती समाधान है। इसके बाद, यूएसआई पहल के तहत गैर-आयोडीन युक्त नमक की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गयाऔर यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गयाकि देशभर में आयोडीन युक्त नमक उपलब्ध हो।

सूक्ष्म पोषक तत्वों में कम मात्रा में विटामिन तथामिनरल शामिल होतेहैं और वे बेहतर स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और दुख की बात है कि भारत में आबादी के एक बड़े हिस्सेको आहार संबंधी सीमाओं या जागरूकता की कमी के कारण आहार के ज़रिये इन विटामिन और मिनरल की पर्याप्त मात्रा हासिल करने के लिए जूझना पड़ता है। इसकी वजह से बहुत तरह की कमियां होती है। ऐसे में नमक के फोर्टिफिकेशन सेदेश भर में पोषक तत्वों के सेवन में बढ़ोतरी के लिए आयोडीन और आयरन जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति हो सकती है।

नमक केआयोडीनीकरण ने अपने लॉन्च के बाद से एक लंबा सफर तय किया है, भारत में उच्च सफलता दर हासिल की है। अबनमक केफोर्टिफिकेशन में एक से ज़्यादा मिनरल शामिल किए जाने लगे हैं। उदाहरण के लिए, डबल-फोर्टिफाइड नमक (डीएफएस) में आयोडीन और आयरन दोनों को मिलाया जाता है, जिससे एक साथ दो पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में मदद मिलतीहै।

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