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Sunday, November 17, 2024

दो बेटियों के एक हौसले वाले फैसले से 3 परिवारों को मिली जीवन की सबसे बड़ी खुशी



बिनीत कुमार राय
नित्य संदेश, ट्रास हिंडन। गाजियाबाद की दो बेटियों ने इतना बड़ा दिल दिखाया, जिससे किसी बीमार को नया जीवन मिल गया. दूसरों का जीवन बचाने के लिए इन दो बेटियों ने अपनी ब्रेन डेड 72 वर्षीय मां के ऑर्गन डोनेट करने का साहसिक निर्णय लिया. 

गाजियाबाद के इस परिवार की सहमति के बाद ब्रेन डेड महिला का लिवर और दोनों किडनी सुरक्षित निकल ली गईं. लिवर और एक किडनी को मैक्स हॉस्पिटल वैशाली में सर्जरी कर 2 मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दिया गया, जबकि एक किडनी को अन्य मरीज के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पीएसआरआई हॉस्पिटल भेज दिया गया. जो अंग डोनेट किए गए वो ऐसे मरीजों में ट्रांसप्लांट किए गए जिनकी हालत बेहद गंभीर थी. लिवर 51 वर्षीय पुरुष मरीज के अंदर ट्रांसप्लांट किया गया, जो क्रोनिक लिवर डिजीज से पीड़ित थे. जबकि एक किडनी क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित 43 वर्षीय महिला मरीज का जीवन सुधारने में काम आई.

ये ट्रांसप्लांट सर्जरी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल वैशाली (गाजियाबाद) में की गई. लिवर ट्रांसप्लांट टीम का नेतृत्व लिवर ट्रांसप्लांट एंड बिलियरी साइंस विभाग के चेयरमैन डॉक्टर सुभाष गुप्ता और लिवर ट्रांसप्लांट व बिलियरी साइंस के एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर राजेश डे ने किया. जबकि लिवर ट्रांसप्लांट टीम का नेतृत्व यूरोलॉजी रीनल ट्रांसप्लांट एंड रोबोटिक्स के चेयरमैन डॉक्टर अनंत कुमार और नेफ्रोलॉजी के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉक्टर नीरू पी. अग्रवाल ने किया.

गाजियाबाद के इंदिरापुरम की रहने वाली 72 वर्षीय महिला मरीज दो दिन पहले मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल वैशाली के इमरजेंसी विभाग में पहुंची थीं. जांच-पड़ताल के बाद पता चला कि उन्हें बहुत ही गंभीर ब्रेन हैमरेज हुआ है. न्यूरोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट की क्लिनिकल टीम ने मरीज की हालत को मूल्यांकन किया और उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया. मरीज के ब्रेन डेड होने के चलते डॉक्टरों की टीम ने महिला की दो बेटियों से ऑर्गन डोनेट की संभावनाओं पर चर्चा की. सोच-विचार के बाद दोनों बेटियां अपनी मां के ऑर्गन डोनेट करने के लिए तैयार हो गईं ताकि किसी और मरीज को नया जीवन मिल सके. दोनों बेटियों के इस एक फैसले से ऑर्गन डोनर के इंतजार में अपनी जिंदगी का पल-पल गिन रहे कुछ मरीजों को राहत मिली.

इस तरह के भलाई के काम बहुत लोगों का जीवन बचा लेते हैं, ऐसे में ऑर्गन डोनेशन के बारे में समाज को जाग्रत करने की आवश्यकता है. परिवारों को इस बात पर गौर करना चाहिए कि भले ही वो अपने किसी प्रियजन की हालत से चिंतित हों, लेकिन ब्रेन डेड जैसी स्थिति में अंग दान करने से किसी को नया जीवन मिल सकता है.

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