
नित्य संदेश, इंदौर। 13 अक्टूबर 2026 शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, किला भवन, इंदौर के समाजशास्त्र विभाग में प्राचार्य डॉ. बी. डी. श्रीवास्तव के संरक्षण एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. वी. पी. बैरागी के मार्गदर्शन में समाजशास्त्र विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, अकादमिक एवं शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘सामाजिक अन्वेषण एवं अनुसंधान केंद्र’ की स्थापना की गई। यह केंद्र 12 अक्टूबर 2026 से प्रभावशील हुआ। केंद्र का विधिवत उद्घाटन 13 अक्टूबर 2026 को अग्रणी महाविद्यालय माता जीजाबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इंदौर के प्राचार्य प्रो. अशोक सचदेवा द्वारा फीता काटकर किया गया।
इस अवसर पर प्रो. अशोक सचदेवा ने समाजशास्त्र विभाग को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए बधाई देते हुए केंद्र की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से छात्राओं को क्षेत्रीय अध्ययन, फील्ड वर्क, सामाजिक सर्वेक्षण, आँकड़ों के संकलन, शोधपत्र लेखन तथा शोध पत्रिकाओं एवं जर्नल में प्रकाशन जैसी गतिविधियों से जुड़ने के अवसर प्राप्त होंगे। इससे छात्राओं में अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित होने के साथ उनकी अकादमिक क्षमताओं में भी वृद्धि होगी।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बी.डी. श्रीवास्तव ने समाजशास्त्र विभाग को शुभकामनाएँ देते हुए छात्राओं में शोधपरक दृष्टिकोण विकसित करने तथा विभिन्न विषयों के मध्य अंतःविषयक समझ को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक अन्वेषण एवं अनुसंधान केंद्र छात्राओं को समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने, सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करने तथा शोध गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करेगा।
समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. निशा जैन ने केंद्र की स्थापना के उद्देश्यों एवं भावी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की भावना के अनुरूप स्थापित यह केंद्र छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विश्लेषणात्मक क्षमता और शोध अभिरुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
लोक संस्कृति के संरक्षण एवं परिवर्तन पर विशेष व्याख्यान
अनुसंधान केंद्र की प्रारंभिक अकादमिक गतिविधियों के अंतर्गत शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रतलाम के समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सौरभ गुर्जर ने ‘लोक संस्कृति : संरक्षण, परिवर्तन और चुनौतियाँ’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने लोक संस्कृति की अवधारणा, उसकी विविधता तथा बदलते सामाजिक परिवेश में उसमें हो रहे परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. गुर्जर ने कहा कि लोक संस्कृति समाज की परंपराओं, मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सामूहिक जीवन-पद्धति की संवाहक है। वर्तमान समय में लोक संस्कृति का संरक्षण करते हुए सकारात्मक परिवर्तनों को स्वीकार करना भी आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि महिलाएँ लोक संस्कृति की प्रमुख संवाहक हैं तथा उसके संरक्षण और भावी पीढ़ियों तक हस्तांतरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
शैक्षणिक सहयोग के लिए हुआ एमओयू
इस अवसर पर दोनों महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों के मध्य शैक्षणिक विचारों, शोध अनुभवों तथा अकादमिक गतिविधियों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया गया। इस सहयोग से भविष्य में शोधपरक गतिविधियों, ज्ञान-विनिमय और शैक्षणिक सहभागिता को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की आईक्यूएसी प्रभारी प्रो. मनीषा जोशी, संकाय सदस्य प्रो. ज्योति मेहता, प्रो. संगीता शर्मा, प्रो. रेणुका उपाध्याय एवं प्रो. शीतल झा की सक्रिय सहभागिता रही। समाजशास्त्र विभाग की लगभग 150 छात्राओं ने केंद्र के उद्घाटन एवं लोक संस्कृति विषयक व्याख्यान में उत्साहपूर्वक भाग लिया और लोक संस्कृति के विविध आयामों तथा समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता को समझा।
कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र विभाग की संकाय सदस्य प्रो. डॉ. शीतल झा ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रो. रेणुका उपाध्याय ने किया।
‘सामाजिक अन्वेषण एवं अनुसंधान केंद्र’ की स्थापना समाजशास्त्र विभाग में शोधपरक शिक्षा, क्षेत्रीय अध्ययन, नवाचार एवं अंतःविषयक अकादमिक गतिविधियों को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल है। यह केंद्र छात्राओं को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर सामाजिक वास्तविकताओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
No comments:
Post a Comment