विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर स्वस्थ एवं नशामुक्त समाज निर्माण का संदेश दिया
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के भौतिकी विभाग एवं विधि विभाग में साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति विषय पर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशीली दवाओं एवं अन्य मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों से अवगत कराना तथा उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता एवं परिषद के समन्वयक प्रोफेसर कृष्ण कांत शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नशामुक्ति को वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि युवावस्था जीवन निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान अपनाई गई आदतें व्यक्ति के भविष्य, व्यक्तित्व और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करती हैं। नशे की लत न केवल व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं को कमजोर करती है, बल्कि उसके परिवार, शिक्षा, करियर और सामाजिक संबंधों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इसलिए विद्यार्थियों को जागरूक, जिम्मेदार और विवेकशील बनते हुए नशे से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों, सामाजिक संगठनों और युवाओं की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों के विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने में भी है। इस दृष्टि से सेवा संकल्प अभियान विद्यार्थियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अंशु अग्रवाल एवं डॉ. वैशाली पाटिल द्वारा किया गया। उन्होंने नशे की समस्या के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशे की शुरुआत कई बार जिज्ञासा, तनाव, मित्रों के दबाव या परिस्थितियों के प्रभाव में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर निर्भरता का रूप ले सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सचेत किया कि किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, असफलता, अकेलेपन या भावनात्मक परेशानी से निपटने के लिए नशीले पदार्थों का सहारा लेना समाधान नहीं है। इसके स्थान पर सकारात्मक सोच, नियमित दिनचर्या, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों, परिवार के सहयोग और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता को अपनाना चाहिए।
डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. धनपाल सिंह, डॉ. अनिल, डॉ. अपेक्षा एवं डॉ. मनीषा सहित अन्य वक्ताओं ने नशे की प्रवृत्ति के पीछे कार्य करने वाले विभिन्न सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक कारणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से मित्रों की संगति, सामाजिक दबाव, आर्थिक परिस्थितियों तथा नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जानकारी का अभाव जैसे कारकों को रेखांकित किया।
वक्ताओं ने कहा कि किशोरावस्था और युवावस्था में मित्रों का प्रभाव काफी गहरा होता है। कई बार युवा अपने समूह में स्वीकार्यता प्राप्त करने अथवा दूसरों की देखा-देखी नशीले पदार्थों का सेवन शुरू कर देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में सही और गलत के बीच अंतर समझना तथा अनुचित दबाव के सामने दृढ़ता से मना करना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे सकारात्मक सोच रखने वाले मित्रों का चयन करें और ऐसी गतिविधियों से दूरी बनाए रखें, जो उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
सामाजिक दबाव और भावनात्मक अस्थिरता पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि तनाव, असफलता, पारिवारिक समस्याओं या व्यक्तिगत परेशानियों के कारण कुछ युवा नशे की ओर आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि, नशा समस्याओं का समाधान नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर समस्याओं को और गंभीर बना सकता है। ऐसे समय में परिवार, शिक्षक और मित्रों का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। युवाओं को अपनी परेशानियां साझा करने, उचित परामर्श लेने और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सहायता प्राप्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
आर्थिक परिस्थितियों और जागरूकता की कमी का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नशे की लत व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को कमजोर करने के साथ-साथ उसकी शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी प्रभावित कर सकती है। नशे पर खर्च होने वाला धन व्यक्ति और उसके परिवार की आवश्यकताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। वहीं, नशीले पदार्थों के वास्तविक दुष्प्रभावों की जानकारी न होने के कारण युवा कई बार इनके जोखिम को कम करके आंकते हैं। इसलिए विद्यार्थियों के बीच नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना और उन्हें वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सही जानकारी देना आवश्यक है।
वक्ताओं ने नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नशे का दुरुपयोग शारीरिक स्वास्थ्य, स्मरण शक्ति, एकाग्रता, निर्णय क्षमता और मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट, पारिवारिक तनाव, सामाजिक दूरी तथा दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है। लंबे समय तक नशे पर निर्भरता व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को तिरस्कार या उपेक्षा के बजाय संवेदनशीलता, उचित परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि नशामुक्ति केवल किसी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि स्वस्थ परिवार, सशक्त युवा और बेहतर समाज के निर्माण से जुड़ा विषय है। युवाओं को अपने जीवन में अनुशासन, सकारात्मक संगति, खेलकूद, योग, रचनात्मक गतिविधियों और स्वस्थ जीवनशैली को स्थान देना चाहिए। साथ ही, उन्हें अपने आसपास नशे से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील रहते हुए उन्हें उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कशिश, श्रृंखला, तरुण, आशीष सहित अन्य छात्र-छात्राओं का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के कारणों, उसके दुष्परिणामों और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करते हुए नशामुक्त जीवन अपनाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संदेश दिया गया।
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