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Thursday, October 1, 2026

100 से अधिक शिकायतों के निस्तारण पर सवाल, प्रो. अलका चौधरी ने अधिकारियों को भेजे विधिक नोटिस



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। कानोहर लाल स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय की प्राचार्य (बिना प्रशासनिक प्रभार) प्रो. अलका चौधरी ने सीपीग्राम-आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण और प्रबंधन जांच समिति की वैधता को लेकर दो विधिक नोटिस गुरुवार को संबंधित अधिकारियों / पक्षों को भेजे हैं। प्रो. चौधरी के अनुसार, उन्होंने पिछले वर्षों में सीपीग्राम, आईजीआरएस, आरटीआई, विश्वविद्यालय और राज्य सरकार सहित विभिन्न सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष 100 से अधिक शिकायतें दस्तावेजी प्रमाणों के साथ प्रस्तुत की थीं।


उनके द्वारा उठाए गए मुख्य प्रश्न -

  • 100 से अधिक शिकायतों की वास्तविक जांच किसने की और संलग्न दस्तावेज किस अधिकारी ने देखे?
  • किन आधारों पर शिकायतों का निस्तारण किया गया?
  • क्या ऐसी शिकायतों का निस्तारण उन्हीं अधिकारियों द्वारा किया गया जिनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए थे?
  • शिकायतकर्ता को कारण सहित कार्रवाई रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई?


दो विधिक नोटिस - दो अलग विषय

पहला नोटिस - सीपीग्राम-आईजीआरएस शिकायतों की हैंडलिंग और निस्तारण से संबंधित। इसमें उन्होंने प्रत्येक शिकायत की स्वतंत्र जांच और दस्तावेजों के परीक्षण की मांग की है।

दूसरा नोटिस - प्रबंधन जांच समिति के गठन / पुनर्गठन और उसकी कार्यवाही / रिपोर्ट की वैधानिकता से संबंधित। प्रो. चौधरी के अनुसार जिस समिति / रिपोर्ट का उपयोग उनके विरुद्ध किया गया, उसकी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

प्रो. चौधरी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति के विरुद्ध व्यक्तिगत अभियान नहीं है। उनकी मांग है कि सभी आरोपों और विवादित दस्तावेजों का सत्यापन मूल रिकॉर्ड से किया जाए।


स्पेशल ऑडिट और अन्य बिंदु

प्रो. चौधरी के अनुसार वर्ष 2022 से 2024 के बीच उठाए गए वित्तीय एवं प्रशासनिक विषयों के बाद जून 2024 में स्पेशल ऑडिट हुआ। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार स्पेशल ऑडिट और कुलाधिपति के निर्देश पर गठित समिति की कार्यवाही में उनके द्वारा उठाए गए कई मुद्दों से जुड़े तथ्य सामने आए, लेकिन परिणामी कार्रवाई संतोषजनक नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें 28.10.2024 को निलंबित किया गया था और उनके अनुसार यह निलंबन 23.04.2025 को कुलपति द्वारा वापस लिया गया, लेकिन अब तक वास्तविक रूप से कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया है। उन्होंने कुलाधिपति से हस्तक्षेप की मांग की है। जून 2026 में उन्होंने रिट-सी संख्या 10455/2026 के माध्यम से उच्च न्यायालय का रुख किया था।

उन्होंने स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट की तामील को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार आधिकारिक रिकॉर्ड में रिपोर्ट 04.10.2025 को प्रबंधन को तामील दिखाई गई है, जबकि 30.10.2025 की न्यायिक कार्यवाही में प्रबंधन की ओर से रिपोर्ट प्राप्त न होने की स्थिति प्रस्तुत होने की बात कही गई है। उन्होंने मूल प्रेषण, प्राप्ति रसीद और न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों के मिलान की मांग की है। साथ ही लगभग 600 पृष्ठों के संबद्धता संबंधी रिकॉर्ड के गुम होने / अनुपलब्ध होने का मुद्दा भी उठाया है।

प्रो. चौधरी ने कहा कि चार वर्षों में उन्हें पेशेवर, वित्तीय और व्यक्तिगत नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने राज्यपाल एवं कुलाधिपति से फाइलें मंगाने, मूल रिकॉर्ड सुरक्षित कराने और 100 से अधिक शिकायतों के निस्तारण की स्वतंत्र जांच की मांग की है।


दस्तावेज / विधिक नोटिस -

  1. विधिक नोटिस दिनांक 01.10.2026 - सीपीग्राम / आईजीआरएस निस्तारण से संबंधित - https://drive.google.com/file/d/1Rpgp2XG-ThiFgveM-jirXSqaR0mgIZF4/view
  2. विधिक नोटिस दिनांक 01.10.2026 - प्रबंधन जांच समिति से संबंधित - https://drive.google.com/file/d/1G8fn4Tv-1ejA7ycEKewlSi3YsuwQ48bz/view
  3. प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन के माध्यम से प्रस्तुत प्रत्यावेदन - https://drive.google.com/file/d/1FdQSE0n8E6-4yzGBcaH-upZK_V8D-puN/view

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