नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान में सोमवार को विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के दिशा-निर्देशन में हिंदी दिवस के अवसर पर रचनात्मक एवं कलात्मक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कला के माध्यम से विद्यार्थियों में सृजनात्मक अभिव्यक्ति, कलात्मक कौशल तथा भारतीय संस्कृति एवं मातृभाषा हिंदी के प्रति सम्मान और गौरव की भावना विकसित करना था। विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा की गरिमा, महत्व एवं सांस्कृतिक पहचान को विषय बनाकर आकर्षक पोस्टर एवं स्लोगन तैयार किए।
कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. अलका तिवारी, उपनिदेशक, ललित कला संस्थान ने अपने उद्बोधन में कहा कि “हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं, हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान भी है। हमारी भाषा में हमारी संस्कृति, परंपरा, संवेदनाएँ और हमारी जड़ों की पहचान समाहित है। हमें अपनी मातृभाषा के गौरव को बनाए रखते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।”
उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के इतिहास, विकास, महत्व तथा राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका से अवगत कराया। साथ ही भारत की विभिन्न जनजातीय एवं लोक कलाओं का परिचय देते हुए उनकी विशिष्टताओं एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कला और भाषा दोनों हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के सशक्त माध्यम हैं।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. राकेश शर्मा के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों ने ललित कला संस्थान की एजुकेशनल विजिट में सहभागिता की तथा कार्यशाला में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए हिंदी दिवस की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को पोस्टर एवं स्लोगन के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
ललित कला संस्थान के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यशाला में डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ, डॉ. शालिनी धामा, सुशील, दीपांजलि, कृतिका गोयल एवं मोहम्मद खालिद सहित संस्थान के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों द्वारा तैयार उत्कृष्ट कलाकृतियों के अवलोकन एवं सराहना के साथ हुआ।
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