
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के तत्वावधान में पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर उनके विचारों, दर्शन एवं समकालीन प्रासंगिकता पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “इक्कीसवीं सदी में पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन की प्रासंगिकता” रहा।
राजनीति विज्ञान विभाग के सह-विभागाध्यक्ष डॉ. मुनेश कुमार द्वारा विषय प्रवेश कराते हुए कार्यक्रम की विषयवस्तु एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन की मूल अवधारणाओं से उपस्थित विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को परिचित कराया। संकायाध्यक्ष, कला, प्रो. अतवीर सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. देवकी नन्दन भट्ट जी, सहायक आचार्य, समाजशास्त्र विभाग रहे। उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक एवं सामाजिक चिंतन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका चिंतन भारतीय समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखता है। उन्होंने एकात्म मानवदर्शन, अंत्योदय, स्वदेशी, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण विषयक पण्डित दीन दयाल उपाध्याय के विचारों की समकालीन उपयोगिता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण, सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की अवधारणा से जुड़ा हुआ है। वर्तमान समय में जब विकास के साथ सामाजिक न्याय, आत्मनिर्भरता और मानवीय मूल्यों पर चर्चा हो रही है, ऐसे में उनके विचारों का अकादमिक अध्ययन विशेष महत्व रखता है।
कार्यक्रम के अंत में विभागीय शिक्षक एवं समन्वयक डॉ. भूपेंद्र प्रताप सिंह जी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. अतवीर सिंह जी, मुख्य वक्ता डॉ. देवकी नन्दन भट्ट, विभागीय शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक संदर्भों में समझने तथा उस पर शैक्षणिक विमर्श के लिए प्रेरणा प्रदान करना था। कार्यक्रम में डॉ जयवीर सिंह, सह- संयोजक, डॉ. देवेन्द्र कुमार, डॉ सुषमा रामपाल, डॉ चंचल, डॉ. रवि पोसवाल एवं डॉ. सानिया खानम शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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