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Wednesday, September 9, 2026

मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक मूल्यों और कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देना आवश्यक : श्री अंजनी अनुज



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के सेमिनार हॉल में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली के सहयोग से मानवाधिकारों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अंजनी अनुज, प्रेजेंटिंग ऑफिसर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली, विशिष्ट अतिथि प्रो. बीरपाल सिंह, रिसर्च डायरेक्टर, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, डॉ. विवेक कुमार, कोऑर्डिनेटर, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज, तथा कार्यक्रम संयोजक आशीष कौशिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। मुख्य अतिथि अंजनी अनुज, प्रेजेंटिंग ऑफिसर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली ने अपने संबोधन की शुरुआत मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, 1948 की प्रस्तावना से की। उन्होंने बताया कि मानव परिवार के सभी सदस्यों की जन्मजात गरिमा तथा उनके समान और अविच्छिन्न अधिकारों की मान्यता ही विश्व में स्वतंत्रता, न्याय और शांति की आधारशिला है। उन्होंने प्रतिभागियों को भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने मानवाधिकारों के विभिन्न स्वरूपों, जिनमें ब्लू राइट्स अर्थात नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार, रेड राइट्स अर्थात आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकार तथा कलेक्टिव राइट्स अर्थात सामूहिक अधिकार शामिल हैं, पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और कल्याण से गहराई से जुड़े हुए हैं। इन अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्थापित संस्थागत तंत्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मानवाधिकारों से जुड़े मामलों के समाधान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) जैसी संस्थाओं की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला।


अंजनी अनुज ने कहा कि किसी भी अधिकार से संबंधित समस्या का स्थायी समाधान तब तक संभव नहीं है, जब तक संबंधित पक्षों के अधिकारों का समुचित और स्थायी समाधान सुनिश्चित न किया जाए। उन्होंने प्रतिभागियों के विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए NHRC के प्रमुख कार्यों, बंधुआ मजदूरी, डिजिटल संप्रभुता, ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में मानवाधिकारों के दायरे एवं महत्व तथा प्रशिक्षण और इंटर्नशिप में मानवाधिकार शिक्षा की उपयोगिता पर भी विस्तार से जानकारी दी।


मानवाधिकार शिक्षा : कानूनी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा

कार्यक्रम संयोजक आशीष कौशिक ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों के बीच मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि आज के समाज में मानवीय गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और न्याय की रक्षा अत्यंत आवश्यक है। भविष्य के वकील, न्यायाधीश, शिक्षाविद और नीति-निर्माता के रूप में विधि के छात्रों की इन मूल्यों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने मानवाधिकारों के उत्थान तथा संवैधानिक एवं अंतरराष्ट्रीय विधि के प्रावधानों और संबंधित कानूनों पर भी प्रकाश डाला।


मानवाधिकार, शोध और सामाजिक उत्तरदायित्व

प्रो. बीरपाल सिंह, रिसर्च डायरेक्टर, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने मानवाधिकारों की सुरक्षा और शोध के बीच महत्वपूर्ण संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान का प्रसार करना ही नहीं, बल्कि ऐसा ज्ञान एवं शोध विकसित करना भी है जो वास्तविक सामाजिक समस्याओं के समाधान में सहायक हो। उन्होंने शोधार्थियों एवं छात्रों को सैद्धांतिक चर्चाओं से आगे बढ़कर ऐसी शोध करने के लिए प्रेरित किया, जिसमें आम लोगों, विशेषकर कमजोर एवं हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अनुभवों और समस्याओं को प्रमुखता से स्थान मिले।


संवैधानिक आधार और मानवाधिकारों की समझ

रामवीर श्रेष्ठ, संसद टीवी ने मानवाधिकारों के संवैधानिक आधार पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को स्वतंत्रता प्रदान करने के साथ-साथ उनके अधिकारों के संरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करता है। उन्होंने मानवाधिकारों को गरिमापूर्ण जीवन का आधार बताते हुए प्रतिभागियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राप्त ज्ञान एवं मानवीय मूल्यों को अपने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।


मानवाधिकार शिक्षा और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा

डॉ. विवेक कुमार, कोऑर्डिनेटर, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज ने कहा कि मानवाधिकार शिक्षा कानूनी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा है और इसे केवल पुस्तकों एवं परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी सामाजिक, आर्थिक अथवा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, गरिमा, स्वतंत्रता और समानता के साथ जीवन जीने का अधिकार रखता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रतिभागियों को विशेषज्ञ जानकारी प्रदान की गई।


प्रथम तकनीकी सत्र : मानवाधिकारों का उत्थान एवं संवैधानिक-अंतरराष्ट्रीय विधि

प्रथम तकनीकी सत्र में श्री आशीष कौशिक ने मानवाधिकारों के विकास एवं उत्थान के साथ-साथ संवैधानिक एवं अंतरराष्ट्रीय विधि के प्रावधानों तथा मानवाधिकार संरक्षण से संबंधित कानूनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मानवाधिकारों के विकास की पृष्ठभूमि और वर्तमान कानूनी व्यवस्था में उनके महत्व को समझाया।


द्वितीय तकनीकी सत्र : मानवाधिकार संस्थानों की कार्यप्रणाली

द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. विवेक कुमार ने मानवाधिकार संस्थानों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए गठित विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाओं, उनके कार्यों तथा समाज में उनकी उपयोगिता के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।


तृतीय तकनीकी सत्र : महिला एवं बाल संरक्षण कानून

तृतीय तकनीकी सत्र में डॉ. अपेक्षा चौधरी ने महिला एवं बाल संरक्षण कानूनों के संबंध में प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर चर्चा की।


चतुर्थ तकनीकी सत्र : बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी एवं SC/ST संरक्षण कानून

चतुर्थ तकनीकी सत्र में डॉ. सुदेशना एवं डॉ. विकास कुमार ने बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के संरक्षण से संबंधित कानूनों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कमजोर एवं वंचित वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों और उनके प्रभावी उपयोग के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया। कार्यक्रम में डॉ. कुसुमा वती, डॉ. धनपाल, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. सुशील कुमार शर्मा, डॉ. मिनाक्षी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम की सह-संयोजक डॉ. अपेक्षा चौधरी ने मानवाधिकार प्रशिक्षण कार्यक्रम को सार्थक एवं सफल बनाने में सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों की बहुमूल्य उपस्थिति एवं सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। धन्यवाद प्रस्ताव के उपरांत राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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