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Monday, August 24, 2026

केवल मुशायरों से ही उर्दू का विकास संभव नहीं है : हाजी नूर मोहम्मद कुरैशी



ऑल इंडिया मुस्लिम यूथ कन्वेंशन, बुलंदशहर के तत्वावधान में प्रो. असलम जमशेदपुरी का सम्मान समारोह

नित्य संदेश ब्यूरो

बुलंदशहर। प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी के बारे में जानकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतनी बड़ी साहित्यिक शख्सियत का संबंध बुलंदशहर से ही है। वे अपने नाम के साथ ‘जमशेदपुरी’ लगाते हैं, लेकिन पूरी दुनिया में बुलंदशहर का नाम रोशन करने में लगे हुए हैं। बुलंदशहर आगमन पर मैं हृदय की गहराइयों से उनका स्वागत और आभार व्यक्त करता हूँ। ये विचार हाजी नूर मोहम्मद कुरैशी ने व्यक्त किए। वे यहां ऑल इंडिया मुस्लिम यूथ कन्वेंशन, बुलंदशहर के तत्वावधान में अल-फलाह नेशनल स्कूल, बुलंदशहर में आयोजित प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी के सम्मान समारोह में अध्यक्षीय संबोधन दे रहे थे।


उन्होंने आगे कहा कि उर्दू की उन्नति और कल्याण के लिए हमें आगे आना होगा। उर्दू रैलियाँ निकालकर और उर्दू से संबंधित कार्यक्रम आयोजित करके हम उर्दू की स्थिति को बेहतर बना सकते हैं। मैंने पहले भी ‘उर्दू रैली’ के नाम से एक बहुत बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसे आज तक याद किया जाता है। केवल मुशायरों से ही उर्दू का विकास संभव नहीं है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हमारे बच्चे अन्य भाषाओं के साथ-साथ उर्दू का भी अध्ययन करें। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ शुजाअतुल्लाह खान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हाजी नूर मोहम्मद कुरैशी, प्रबंधक, डॉ. राम मनोहर लोहिया डिग्री कॉलेज, मोहाना ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. इरशाद सियानवी, शिक्षक, उर्दू विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने शिरकत की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सैयद शान हैदर रिजवी, एसोसिएट प्रोफेसर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मलिक अदीब बरनी, कला निर्देशक, हमकदम नाट्य संस्था, मेरठ तथा धन्यवाद ज्ञापन काजी अकील अहमद, प्रबंधक, अल-फलाह नेशनल स्कूल, बुलंदशहर ने किया।


इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. इरशाद सियानवी ने कहा कि बुलंदशहर प्रारंभ से ही साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत उर्वर रहा है। यहाँ बड़े-बड़े साहित्यकारों और शायरों के साथ-साथ राजनीतिक हस्तियों ने भी बुलंदशहर का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। नातिक गुलावठी, मुस्तफा खाँ शेफ्ता, मुंशी हरगोपाल तफ्ता, अतहर फारूकी, हसन अस्करी, इंतजार हुसैन, किश्वर नाहिद, अता इब्न फितरत, माहिरुल कादरी, तारिक छतारी, अरजुमंद आरा, मुजफ्फर हुसैन बरनी, मौलाना आशिक इलाही बुलंदशहरी, मौलाना नसीर अहमद खान, निदा फाजली, प्रोफेसर इब्न कनवल, सैफुल्लाह आबिद, मजहर सियानवी, शकील सिकंदराबादी, इरशाद शरर, अ.म. कौसर, जहीर अहमद, अली अब्बास नौगांवी और प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी जैसी महत्वपूर्ण हस्तियों ने साहित्यिक स्तर पर बुलंदशहर को जो पहचान दी है, वह सदैव इतिहास में सुरक्षित रहेगी।उन्होंने कहा कि प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने साहित्य के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय सेवाएँ और उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, उन्हें आज साहित्यिक जगत में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। बुलंदशहर का नाम रोशन करने में असलम जमशेदपुरी की साहित्यिक सेवाओं को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हम सभी बुलंदशहरवासी आप पर गर्व करते हैं।


डॉ. सैयद शान हैदर रिजवी ने कहा कि हमें खुशी है कि आज हम प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी को अपने बीच देख रहे हैं और उनकी सेवाओं को सम्मानित किया जा रहा है। इससे पहले मैंने केवल आपका नाम सुना था, लेकिन आज आपके कार्य और साहित्य में आपकी विशिष्टता को निकट से अनुभव कर रहा हूँ। डॉ. जहीर अहमद खान ने कहा कि बुलंदशहर में हम अनेक राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। कभी-कभी हमें अनेक प्रकार की कटुता और आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है, लेकिन मेरा उद्देश्य केवल साहित्यिक सेवाओं को आगे बढ़ाना है। मैंने कभी श्रोताओं की संख्या पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि हमारा उद्देश्य कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को जागरूक करना है। आज प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी की साहित्यिक सेवाओं से जनता को परिचित कराने के लिए यह मिलन समारोह आयोजित किया गया है। भविष्य में हम उनकी साहित्यिक सेवाओं पर एक बड़े कार्यक्रम के आयोजन के इच्छुक हैं। हमें गर्व है कि आज प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी हमारे बीच उपस्थित हुए हैं।


डॉ. मोहम्मद फाजिल ने कहा कि मैं स्वयं को साहित्य की इतनी बड़ी-बड़ी हस्तियों के बीच बोलने योग्य नहीं समझता, लेकिन यह कहना अपना कर्तव्य समझता हूँ कि आज हमारे बीच ऐसी शख्सियत मौजूद है, जिनके बारे में लोग पुस्तकों में पढ़ते हैं। आपकी अनेक पुस्तकों में बुलंदशहर का उल्लेख मिलता है। इस दृष्टि से प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने बुलंदशहर का नाम दूर-दूर तक रोशन किया है। अंत में प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं आज बहुत खुश हूँ, क्योंकि मैं बुलंदशहर का हूँ और बुलंदशहर मेरा है।” उन्होंने बुलंदशहरवासियों के बीच कहा कि उनका कहानी-संग्रह ‘ईदगाह से वापसी’ और उपन्यास ‘धनौरा’ में बुलंदशहर को केंद्रीय स्थान प्राप्त है।


उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी उर्दू विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में विभागाध्यक्ष के साथ-साथ अनेक साहित्यिक संस्थाओं और संगठनों के सदस्य एवं संरक्षक के रूप में सामाजिक तथा शैक्षिक सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। विभिन्न विषयों पर उनकी दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके कई कहानी-संग्रह उर्दू के साथ-साथ हिंदी में भी प्रकाशित होकर लोकप्रिय हो चुके हैं। उनके उपन्यास ‘धनौरा’ ने भी उर्दू जगत में खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं। इसके अतिरिक्त उनके साहित्यिक, राजनीतिक और सामाजिक विषयों से संबंधित लेख लगभग प्रत्येक माह न केवल भारत, बल्कि विदेशों की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं।


इस अवसर पर मोहम्मद गुलजार, मोहम्मद आबिद, मास्टर मुशीर रियाज, मुस्लिम इंटर कॉलेज, मास्टर सैयद साजिद अली, अब्दुल खालिक अंसारी, मुशीर अंसारी, अफजाल अहमद बरनी, शमीम अहमद (पत्रकार), सोहैब खान, आदिल मंसूरी, जुबैर शाद, मास्टर इलियास मोहम्मद खान, मोहम्मद यासीन, अकील अहमद, सरदार अंसारी सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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