Breaking

Your Ads Here

Thursday, August 20, 2026

हम कहीं भी जाएँ, लेकिन हमारी पहचान भारतीय है : प्रो. सगीर अफ़राहीम

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। आज के कार्यक्रम में उर्दू की नफ़ासत और हिंदी की लालित्य है। मुशायरे और कवि सम्मेलन में मुस्कराहट भी है और व्यंग्य भी, प्रसन्नता भी है और गंभीरता भी। यहाँ स्वतंत्रता संग्राम ने हमें यही संदेश दिया कि हिंदी और उर्दू को हम अलग नहीं कर सकते। ओमान, लंदन, मॉरीशस आदि दूसरे देशों में जहाँ भारतीय रहते हैं, वहाँ भी लोग देश की स्वतंत्रता का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी ने हमारे साथ बहुत बड़ा छल किया और हमारे घर, धर्म, संप्रदाय, त्योहार आदि पर आक्रमण किया। स्वतंत्रता संग्राम हिंदू-मुसलमान की लड़ाई नहीं, बल्कि भारत के प्रत्येक निवासी की लड़ाई थी। यह तिरंगा हमें शांति और भाईचारे का संदेश देता है। आज बिस्मिल, हसरत, रवाँ, जोश, टैगोर, नज़रुल इस्लाम आदि ने स्वतंत्रता का जो बीज बोया था, वह मानवता और भाईचारे का बीज था। अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ाँ, भगत सिंह, आज़ाद आदि ने देश के लिए अनेक बलिदान दिए। मेरठ तो स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख केंद्र रहा है। हम कहीं भी जाएँ, लेकिन हमारी पहचान भारतीय है।


ये विचार प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. सगीर अफ़राहीम (अलीगढ़) ने उर्दू विभाग और आयुसा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘स्वतंत्रता के अवसर पर मुशायरा एवं कवि सम्मेलन’ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ सईद अहमद ने पवित्र कुरआन की तिलावत से किया। फ़रहत अख़्तर ने नात प्रस्तुत की। कार्यक्रम की संरक्षकता प्रसिद्ध आलोचक, कथाकार एवं उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने की, जबकि अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. सगीर अफ़राहीम ने की। मुख्य अतिथियों के रूप में प्रो. फ़ारूक़ बख्शी, पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद तथा अमीर मेहदी (इंग्लैंड) ने ऑनलाइन सहभागिता की। आमंत्रित शायरों के रूप में डॉ. ईश्वर चंद गंभीर, एडवोकेट इरशाद बेताब (चौहान), वारिस वारसी, सरोज दुबे, मीशाब इलाहाबादी, वंदना कुंवर रायज़ादा, डॉ. फ़ुरक़ान सरधनवी तथा मौलाना सैयद नायाबुद्दीन नायाब ने सहभागिता की। स्वागत भाषण डॉ. आसिफ़ अली ने दिया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. अलका वशिष्ठ ने किया।


विषय का परिचय कराते हुए डॉ. इरशाद स्यानवी ने कहा कि जिस प्रकार हमारे साहित्यकारों एवं आलोचकों ने उपन्यासों, कहानियों तथा शोधपरक और आलोचनात्मक लेखन में देशप्रेम की भावनाओं को अभिव्यक्त किया, उसी प्रकार अनेक कवियों ने भी अपनी रचनाओं में देशप्रेम तथा देश की स्वतंत्रता के संबंध में अपने भावों को अत्यंत कलात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया। देशप्रेम तथा देशवासियों के प्रति प्रेम की भावना को व्यक्त करते हुए अल्लामा इक़बाल, फ़ैज़, जोश आदि ने अनेक कविताएँ और ग़ज़लें प्रस्तुत कीं।


प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. असलम जमशेदपुरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम सबसे पहले भारतीय हैं। देश की स्वतंत्रता में सभी वर्गों के लोगों का बलिदान शामिल है। हम सभी गंगा-जमुनी संस्कृति को सजाने और सँवारने के प्रयास में लगे हुए हैं। देशप्रेम की भावना में हम सभी को आगे आना चाहिए और यह प्रयास करना चाहिए कि देश में सदैव शांति, सौहार्द और सुख-चैन बना रहे। देश की स्वतंत्रता के लिए हिंदू और मुस्लिम सभी कवियों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया।


सरोज दुबे ने कहा कि स्वतंत्रता के दीवानों को पराजय किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं थी। देशवासियों ने अपने प्रेम और साहस के बल पर देश को स्वतंत्र कराया। हमारे देश में सभी प्रकार के लोग निवास करते हैं। वे हिंदू हों या मुसलमान, सभी देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हैं।

वंदना कंवर रायज़ादा ने कहा कि आज हम स्वतंत्रता के संबंध में आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मिलित हैं और कविता के माध्यम से मैं अपने पिता की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ा रही हूँ। शहीदों को नमन करते हुए उन्होंने कहा—

बारूद से, चाकू से, न ख़ंजर से बात कर,

गर कर सके तो दिल के ही अंदर से बात कर।

जिसमें खिलें बहार बन के एकता के फूल,

कुछ इस तरह से दिल के तो बंजर से बात कर।

मिलती है जिसमें जाकर हर एक प्यार की नदी,

इंसानियत के ऐसे समंदर से बात कर।

डॉ. फ़ुरक़ान सरधनवी ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—

तुमने मेरी तन्हाई का मंज़र नहीं देखा,

आँखों में मेरी अश्कों का लश्कर नहीं देखा।

क्या मुझ पर गुज़रती है जुदाई में तुम्हारी,

जिस दिन से गए तुमने पलटकर नहीं देखा।

वैसे तो तुम्हें रहती है मेरी फ़िक्र शब-ओ-रोज़,

किस हाल में हूँ, तुमने कभी आकर नहीं देखा।

वारिस वारसी ने अपनी रचना में कहा—

हमारा हिंदुस्तान,

यह प्यारा हिंदुस्तान।

इसमें जन्मे वीर भगत सिंह, अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ाँ,

हमारा हिंदुस्तान, यह प्यारा हिंदुस्तान।

हर दिन त्योहारों के रंग-बिरंगे मान,

हमारा हिंदुस्तान, यह प्यारा हिंदुस्तान।

देखो-देखो वारिस, इसकी मुस्काती है शान,

हमारा हिंदुस्तान, यह प्यारा हिंदुस्तान।

एडवोकेट इरशाद बेताब ने कहा—

ग़म का एहसास भुलाया भी तो जा सकता है,

ज़ुल्म-ओ-दहशत को मिटाया भी तो जा सकता है।

सूनी आँखों को यह पागल कर देती है,

इंसान के एहसास को भी घायल कर देती है।

हसरतों, क्यों उदास आज बैठी हो तुम,

पास दरिया के रह के भी प्यासी हो तुम।

मौलाना सैयद नायाबुद्दीन नायाब ने अपनी कविता ‘शिकवा-ए-वतन’ प्रस्तुत करते हुए कहा—

गाँधी, पटेल, नेहरू मेरे ग़मगुसार थे,

दुनिया में उनका नाम था, वे बा-वक़ार थे।

मुझको वह करके किसके हवाले चले गए,

क्यों मस्जिदों से दूर शिवाले चले गए।

घुट-घुट के रो रहा हूँ, मेरा कोई अब नहीं,

जम्हूरियत कहाँ है, पता कोई अब नहीं।

मीशाब इलाहाबादी ने कहा—

दोस्तों, खुशियाँ मनाओ, यौम-ए-आज़ादी है आज,

पूरे भारत को सजाओ, यौम-ए-आज़ादी है आज।

डॉ. ईश्वर चंद गंभीर ने कहा—

शहादत और क़ुर्बानी हमें यूँ ही नहीं मिलते,

तभी तो लोग डरते हैं वतन की राह पर चलते।

अब तो दामन भी चाक सर-ए-राह होता है,

आज निर्दोष का साबित गुनाह होता है।

अमीर मेहदी ने अपनी रचना के माध्यम से कहा—

किसी को क़त्ल कर देता, किसी का घर जलाता,

शुजाअत उसको कहते हैं तो अपनी बुज़दिली अच्छी।

चाक है शब का गरेबाँ, मगर क्या कीजिए,

सुबह के रुख़ पे कोई नूर, कोई आब नहीं।

इससे बेहतर तो वही रात की तारीकी थी,

कम से कम सुबह की उम्मीद लिए रहते थे।

इस सहर से तो वही सहर अच्छी थी।

प्रो. फ़ारूक़ बख्शी ने देशप्रेम से ओत-प्रोत कविता प्रस्तुत करते हुए कहा—

ऐ वतन, ऐ वतन, मेरे प्यारे वतन,

तेरी धरती का मुँह चूमता है गगन।

तेरे माथे की माला का झूमर सजे,

तेरे दामन में गंगा की धारा बहे।

तेरे खेतों में केसर महकती रहे,

तेरी मिट्टी से महके मेरा तन-बदन।

ऐ वतन, ऐ वतन, मेरे प्यारे वतन।

कुछ अलग अपनी मिट्टी की तासीर है,

इसके पैरों में कब कोई ज़ंजीर है।

यह मोहब्बत की इक ऐसी जागीर है,

अपना-अपना है सबका यहाँ पर चलन।

ऐ वतन, ऐ वतन, मेरे प्यारे वतन।

इस अवसर पर डॉ. सकीना (मॉरीशस), डॉ. रेशमा परवीन (अध्यक्ष आयुसा)डॉ. शादाब अलीम, सैयदा मरियम इलाही, मोहम्मद शमशाद, शाह-ए-ज़मन आदि भी कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े रहे।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here