एन.ए.एस. इंटर कॉलेज के विज्ञान शिक्षक दीपक शर्मा की पहल: गीले कचरे से खाद बनाने का वीडियो बना मिसाल
शिक्षा विभाग द्वारा इस अभिनव प्रयोग को सराहा जा रहा है, जिसके तहत स्कूली बच्चे कचरे को समस्या नहीं, बल्कि संसाधन के रूप में देखना सीख रहे हैं।
श्री शर्मा द्वारा बनाई गई इस लघु फिल्म का मुख्य उद्देश्य रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे को कूड़ेदान में फेंकने के बजाय उससे कम लागत में उपजाऊ जैविक खाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।
वीडियो में बताई गई वैज्ञानिक विधि के मुख्य बिंदु:
1. कचरा पृथक्कीकरण है पहला कदम: फिल्म में फल-सब्जियों के छिलके, बची हुई चाय पत्ती जैसे गीले कचरे और सूखे पत्तों को अलग-अलग एकत्र करने के महत्व को समझाया गया है।
2. देसी जुगाड़ से कंपोस्ट बिन: महंगे उपकरणों के बिना, एक पुराने प्लास्टिक के डिब्बे की तली काटकर और चारों ओर छोटे-छोटे छेद करके उसे जमीन में गाड़ने का आसान तरीका बताया गया है। इससे कचरे को सड़ने के लिए जरूरी हवा और नमी मिलती रहती है।
3. लेयरिंग की वैज्ञानिक तकनीक: बिन के अंदर सबसे नीचे सूखी पत्तियों की एक परत, उसके ऊपर गीला कचरा और फिर ऊपर से दोबारा सूखी पत्तियों की परत बिछाकर ढक्कन बंद करने की विधि का प्रदर्शन किया गया है।
4. बिना खर्च, बिना दुर्गंध के खाद तैयार: इस विधि से कुछ ही हफ्तों में बिना किसी बदबू और बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पोषक तत्वों से भरपूर भुरभुरी जैविक खाद तैयार हो जाती है, जिसका उपयोग स्कूल के बगीचे और घर के गमलों में किया जा सकता है।
इस पहल का असर यह हो रहा है कि छात्र न केवल विद्यालय में कचरा प्रबंधन का पाठ सीख रहे हैं, बल्कि अपने घरों में भी कंपोस्टिंग अपनाने के लिए अपने परिवार को प्रेरित कर रहे हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि दीपक शर्मा जी का यह प्रयास नई शिक्षा नीति के तहत व्यावहारिक और अनुभव-आधारित शिक्षा का उत्तम उदाहरण है, जो छात्रों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और वैज्ञानिक सोच दोनों विकसित कर रहा है।

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