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Saturday, August 8, 2026

ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रचिंतन का महासंगम द्वारा आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रचिंतन का महासंगम द्वारा आयोजित  संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र परम पूज्य संतों, मूर्धन्य शिक्षाविदों एवं पद्म विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति में अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। 


इस अवसर पर मंच पर मंचासीन सभी आदरणीय अतिथियों द्वारा रखे गए। मुख्य विचार परम पूज्य संत ओमानंद जी महाराज ने रखते हुए कहा कि "शिक्षक की एक गलती से पूरे राष्ट्र का नुकसान होता है; इसलिए शिक्षाविदों को योग, ध्यान, विज्ञान और अनुसंधान का स्तर निरंतर ऊंचा उठाना चाहिए।" उन्होंने दैनिक जीवन में 1 घंटा योग-ध्यान करने तथा पतंजलि योग सूत्र का मनन करने का आह्वान किया।

"महर्षि अरविंद के विचारों के अनुरूप भारत का प्रारब्ध विश्व का मार्गदर्शन करना है और भारत पुनः उस ओर अग्रसर है। समाज के सामने उपस्थित वैचारिक चुनौतियों का सामना करने के लिए संपूर्ण समाज को अपना राष्ट्रीय चरित्र मजबूत करना होगा।" —मिलिंद जी परांडे मुख्य अतिथि


"इंडिया से हिंदुस्तान और भारत तक की यात्रा हमें गौरव की अनुभूति कराती है; यह भूमि केवल माटी नहीं, हमारी माता है।मानसिक गुलामी से बाहर निकलकर हर बच्चे को बुनियादी शिक्षा और उच्च स्तर के शोध के अवसर प्रदान करने होंगे।" —विनोद अग्रवाल

"मालवी लोक संगीत और भजन परंपरा के माध्यम से भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार पर जोर दिया। कला और लोक-संस्कृति को राष्ट्र-निर्माण तथा सामाजिक समरसता का प्रमुख आधार बताया।" —पद्मश्री कालूराम जी बामनिया


"हमारी पारंपरिक विद्याओं और कला को आधुनिक अनुसंधान व तकनीक के साथ जोड़ने पर बल दिया।समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और कौशल का लाभ पहुँचाने का आह्वान किया।" —पद्मश्री भालचंद्र दत्तात्रय मोंडे जी

"विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों के माध्यम से उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने पर बल दिया। युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्र-विचार से जोड़ने की बात कही।" —डॉ. राकेश सिंघाई (कुलगुरु, DAVV इंदौर)

"आधुनिकता और विज्ञान के साथ-साथ अपनी ऋषि-संस्कृति पर आधारित ज्ञान-परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।शोधार्थियों और शिक्षाविदों को समाज के नव-निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।" —डॉ. राजेश जी चावला

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