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Friday, August 21, 2026

मेरठ जिले में 9 सितंबर को 780 हरिशंकरी पौधों का रोपण

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। लोक भारती एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से आगामी 9 सितंबर 2026 को मेरठ जिले के सभी गांवों तथा नगरीय क्षेत्र के सभी वार्डों में 780 हरिशंकरी पौधों—पीपल, बरगद एवं पाकड़—का रोपण किया जाएगा।

इस अभियान की कार्ययोजना तैयार करने के लिए जिलाधिकारी डॉ. विजय सिंह जी की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में हरिशंकरी पौधों के रोपण, पौधों की उपलब्धता, स्थान चयन, संरक्षण एवं देखभाल की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। अभियान का उद्देश्य जिले के प्रत्येक गांव एवं नगरीय वार्ड में हरिशंकरी का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जल संरक्षण एवं हरित क्षेत्र को बढ़ावा देना है। लोक भारती एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से संचालित यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से मेरठ को अधिक हरा-भरा एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

24 से 29 अगस्त तक होंगी स्थानीय स्तर पर बैठकें
जिलाधिकारी डॉ. विजय सिंह ने कहा कि पौधारोपण की इस अनूठी पहल के माध्यम से हरिशंकरी रोपण अभियान में मेरठ को जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है। अभियान को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए 24 से 29 अगस्त के बीच ब्लॉक, नगर पालिका, नगर पंचायत एवं नगर निगम स्तर पर बैठकें आयोजित की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि विकासखंड स्तर पर खंड विकास अधिकारी (BDO) तथा स्थानीय निकायों में संबंधित अधिकारी एवं अधिशासी अधिकारी (EO) नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। इन बैठकों में रोपण स्थलों का चयन, पौधों की उपलब्धता तथा उनके रोपण एवं संरक्षण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

जिलाधिकारी ने प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण में हरिशंकरी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पीपल, बरगद एवं पाकड़ का संयुक्त रोपण पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने ‘गॉड्स ट्री’ एवं ईश्वरीय पौधों के रूप में मधुमालती, मधुकामिनी एवं अपराजिता के महत्व को भी रेखांकित किया तथा इनके संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

हरिशंकरी के पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश
बैठक में लोक भारती के संगठन सचिव कृष्ण चौधरी ने कहा कि ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के प्रतीक के रूप में पीपल, बरगद एवं पाकड़ को एक ही थाले में रोपित करने की परंपरा हरिशंकरी को विशेष महत्व प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि हरिशंकरी पर्यावरण एवं जल संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये वृक्ष लंबे समय तक जीवित रहते हैं और पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता तथा भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सामाजिक संगठनों की रहेगी सक्रिय सहभागिता
अभियान में लोक भारती, गायत्री परिवार, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, आर्य समाज, आर्ट ऑफ लिविंग, डेरा सच्चा सौदा, व्यापार संघ, सर्वजन हिताय फाउंडेशन, भारत विकास परिषद, सेवा भारती, किचन गार्डन, हरितिमा क्लब-60, बेटियाँ फाउंडेशन, पहल एक प्रयास, जागरूक नागरिक एसोसिएशन एवं अन्य सामाजिक संगठनों का सहयोग रहेगा। सभी संस्थाओं ने हरिशंकरी रोपण अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा पौधों के रोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

हरिशंकरी रोपण समिति का गठन
बैठक में अभियान के प्रभावी संचालन एवं समन्वय के लिए हरिशंकरी रोपण समिति का गठन किया गया। समिति के नोडल अधिकारी डीएफओ होंगे। समिति में विनोद भारती, पवन त्यागी, निकुंज राज, निकुंज गर्ग, सुब्रमण सिंह, प्रियंका सिंघल, सचिन साधारण, शिवेंद्र बेम्बी, रमोत कुमार भारद्वाज, कशीम गोपाल भारद्वाज, मनोज गोयल एवं प्रमोद कुमार आदि को शामिल किया गया। समिति पौधों की उपलब्धता, रोपण स्थलों के चयन, विभिन्न सामाजिक संगठनों के समन्वय तथा पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन की व्यवस्था में सहयोग करेगी।

बैठक का संचालन लोक भारती के संयोजक डॉ. सुमित उपाध्याय जी ने किया। उन्होंने अभियान की रूपरेखा एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए सभी सहभागी संस्थाओं एवं अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। बैठक के अंत में डीएफओ वंदना भोंगात ने उपस्थित अधिकारियों, सामाजिक संगठनों एवं सभी सहभागियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) श्री विजय वर्धन तोमर, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण श्री सुनील कुमार सिंह तथा अपर नगर आयुक्त श्रीमती लवी त्रिपाठी जी को प्रशासनिक स्तर पर नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

ये सभी अधिकारी नोडल अधिकारी डीएफओ वंदना फोगाट जी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अभियान की कार्ययोजना को धरातल पर लागू करेंगे तथा 9 सितंबर को प्रस्तावित हरिशंकरी रोपण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक अंतिम रूप तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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