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Friday, August 7, 2026

45 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विचार न करने के आदेश पर CAT ने लगाई रोक, डाक विभाग से चार सप्ताह में जवाब तलब



नित्य संदेश ब्यूरो


प्रयागराज। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), अतिरिक्त पीठ इलाहाबाद के समक्ष रानी बंसल पत्नी स्वर्गीय दलीप कुमार बंसल निवासी शास्त्री नगर, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ ने अनुकंपा नियुक्ति एवं पेंशन संबंधी मामले को लेकर याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने अधिकरण के समक्ष पक्ष रखते हुए मामले में विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी।


बहस के दौरान अधिवक्ता सुनील चौधरी ने अधिकरण के सदस्य न्यायाधीश राजीव जोशी को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता वर्ष 1980 में डाक विभाग में सेवा के दौरान मृत्यु को प्राप्त हुए थे। वह डाक विभाग में एक्स-मेल ऑफिस सुपरिंटेंडेंट के पद पर परीक्षितगढ़ में कार्यरत थे। उनकी मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता की बड़ी बहन ने मृतक आश्रित कोटे में अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग द्वारा उस आवेदन पर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसी बीच याचिकाकर्ता की बड़ी बहन का विवाह हो गया। बाद में याचिकाकर्ता रानी बंसल बालिग हुईं और उनका विवाह हुआ। वर्ष 2020 में उनके पति की भी मृत्यु हो गई। वर्तमान में याचिकाकर्ता की माता को पारिवारिक पेंशन मिल रही है और याचिकाकर्ता अपनी माता पर निर्भर हैं। अधिवक्ता ने अधिकरण को यह भी बताया कि याचिकाकर्ता कैंसर से पीड़ित थी और उत्तर प्रदेश सरकार की आर्थिक सहायता से उनका उपचार कराया गया है। इसी बीच याचिकाकर्ता की माता ने सीनियर पोस्टमास्टर, मेरठ सिटी, मेरठ को प्रार्थना पत्र देकर पेंशन संबंधी अभिलेखों में याचिकाकर्ता का नाम दर्ज किए जाने का अनुरोध किया, लेकिन उस पर भी विभाग द्वारा आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।


देरी पर निर्णय का अधिकार सेक्रेटरी को, प्रवर अधीक्षक को नहीं : अधिवक्ता

अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बहस के दौरान केंद्रीय सरकार की वर्ष 2022 की अनुकंपा नियुक्ति संबंधी योजना का हवाला देते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन में हुई देरी के संबंध में निर्णय केवल देरी देखकर नहीं किया जा सकता। आवेदक की परिस्थितियों और मामले के सभी तथ्यों को देखते हुए देरी पर निर्णय लेने का अधिकार सक्षम स्तर पर सचिव (Secretary) को प्राप्त है। उन्होंने तर्क दिया कि प्रवर अधीक्षक डाकघर को देरी के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को अस्वीकार करने का कोई स्वतंत्र अधिकार प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद प्रवर अधीक्षक द्वारा याचिकाकर्ता के मामले में लगभग 45 वर्ष की देरी का हवाला देते हुए उसके आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया गया। अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किए जाने के बाद कार्यालय प्रवर अधीक्षक डाकघर की ओर से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे। याचिकाकर्ता ने मांगे गए दस्तावेज विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर दिए। इसके बाद 26 मई 2026 को प्रवर अधीक्षक डाकघर की ओर से आदेश पारित करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता के पिता की मृत्यु वर्ष 1980 में हुई थी और लगभग 45 वर्ष बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया, इसलिए अत्यधिक विलंब के कारण आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता।


CAT ने प्रवर अधीक्षक के आदेश पर लगाई रोक

मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सुनील चौधरी ने अधिकरण के समक्ष जोरदार तर्क दिया कि केंद्र सरकार की वर्ष 2022 की योजना के तहत देरी के मामले में याचिकाकर्ता की परिस्थितियों पर विचार कर सचिव स्तर पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है, जबकि प्रवर अधीक्षक को इस आधार पर आवेदन को विचार से बाहर करने का अधिकार नहीं है। बहस के बाद केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, अतिरिक्त पीठ, इलाहाबाद ने प्रवर अधीक्षक डाकघर द्वारा पारित उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके द्वारा याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विचार करने से इनकार किया गया था।


अधिकरण ने मामले में डाक विभाग से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर 2026 की तारीख नियत की गई है। इस आदेश से याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर फिलहाल विभागीय स्तर पर लगाए गए रोक के आदेश को राहत मिली है और अब मामले में केंद्र सरकार की अनुकंपा नियुक्ति योजना के तहत देरी तथा याचिकाकर्ता की वर्तमान परिस्थितियों पर सक्षम स्तर पर विचार किए जाने का रास्ता खुल गया है।

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