नित्य संदेश ब्यूरो
नई दिल्ली। एनसीआरटीसी ने एनएनआरएल (एनआईआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड) के साथ 110 मेगा वॉट के कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के लिए पावर परचेज़ एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए। इस प्लांट को एनएनआरएल द्वारा विकसित किया जाएगा। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक श्री शलभ गोयल, एनआईआरएल के निदेशक, वित्त एवं सीएमडी डेज़िगनेट, डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य, एनसीआरटीसी की निदेशक, वित्त, श्रीमती नमिता मेहरोत्रा, एनसीआरटीसी के निदेशक, इलेक्ट्रिकल्स एंड रोलिंग स्टॉक, श्री महेंद्र कुमार और एनसीआरटीसी एवं एनआईआरएल के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
देश के आरआरटीएस और मेट्रो परिवहन प्रणाली के लिए यह अपनी तरह की पहली कैप्टिव सोलर पावर परियोजना है, जो शहरी परिवहन में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण की दिशा में एक बैंचमार्क स्थापित कर रही है। अनुमानित है कि इसके माध्यम से दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा सकेगा। स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के ज़रिए यह परियोजना कॉरिडोर की दीर्घकालिक संचालन क्षमता को सुदृढ़ करेगी। इस सोलर प्लांट की अनुमानित लागत लगभग ₹450 करोड़ है और इसे उत्तर प्रदेश के जालौन शहर में 80:20 डेट-इक्विटी फंडिंग मॉडल के ज़रिए विकसित किया जाएगा। प्लांट में उत्पन्न होने वाली बिजली उत्तर प्रदेश स्टेट ग्रिड के माध्यम से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मौजूद एनसीआरटीसी के रिसीविंग सबस्टेशनों (RSS) तक पहुंचाई जाएगी, जहां से इसे नमो भारत कॉरिडोर में वितरित किया जाएगा। यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सोलर एनर्जी पॉलिसी का लाभ उठा रही है। इसे अगले 24 महीनों में परिचालित करने की योजना है।
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के कुल परिचालन व्यय का लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा बिजली पर खर्च होता है, जो इसके प्रमुख आवर्ती खर्चों में से एक है। इस कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के संचालन के बाद बिजली के खर्च में लगभग 25 प्रतिशत की कमी अनुमानित है, साथ ही यह एक स्वच्छ एवं अधिक सतत भविष्य में योगदान देगा। इस समझौते के तहत, एनसीआरटीसी 25 साल की अवधि के लिए तय टैरिफ पर कैप्टिव सोलर पावर प्लांट से उत्पन्न होने वाली बिजली खरीदेगा, जिससे लंबे समय तक बिजली की लागत को स्थिर रखने में मदद मिलेगी और ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आर्थिक लाभ के अलावा, यह परियोजना पर्यावरण लाभ की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। पारंपरिक स्रोतों से मिलने वाली बिजली के एक बड़े भाग की जगह स्वच्छ सौर ऊर्जा का प्रयोग कर, इस परियोजना द्वारा हर साल लगभग 1.77 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी अनुमानित है, जिससे स्वच्छ और सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल से नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) जैसे हानिकारक प्रदूषकों के उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है, जिससे हवा स्वच्छ होगी और क्षेत्र में सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
इस पहल की शुरुआत दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की परिचालन यात्रा में एक ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर की जा रही है जब फरवरी 2026 में पूरे कॉरिडोर पर परिचालन के आरंभ के बाद से यात्रियों की संख्या में लगातार और उत्साहजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल प्रणाली को सुशासन का “बहुत अच्छा उदाहरण” बताया है और इसके समय पर पूरा होने और अच्छी सेवा की प्रशंसा की है। वर्तमान में, इस कॉरिडोर पर हर दिन लगभग एक लाख यात्री सफर कर रहे हैं और इसने 4 करोड़ से अधिक कम्यूटर ट्रिप्स का माइलस्टोन पार कर लिया है। कॉरिडोर पर 1.68 लाख से अधिक यात्रियों के साथ रक्षाबंधन के दिन, 28 अगस्त को अब तक की सबसे अधिक दैनिक यात्री संख्या दर्ज की गई है। नमो भारत ट्रेनों ने अधिक मांग, भीषण गर्मी, मॉनसून और कांवड़ यात्रा व दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान भी लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।
यह परियोजना एनएनआरएल द्वारा विकसित की जा रही है, जो एनसीआरटीसी और एनआईआरएल (नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन यानी एनएलसी की 100% सब्सिडियरी) का जॉइंट वेंचर है। देश के आरआरटीएस और मेट्रो परिवहन प्रणाली के लिए एक अग्रणी कैप्टिव सोलर पावर परियोजना के रूप में, यह पहल भविष्य के उन शहरी और क्षेत्रीय ट्रांज़िट नेटवर्क के लिए एक मॉडल का काम करेगी, जो अपने संचालन में नवीकरणीय ऊर्जा को शामिल करना चाहते हैं। दीर्घकालिक आर्थिक बचत और पर्यावरण को होने वाले बड़े फायदों के साथ, यह परियोजना एक कुशल, सतत और भविष्य के लिए तैयार सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के निर्माण के एनसीआरटीसी के संकल्प को और सुदृढ़ करती है।

.jpeg)

No comments:
Post a Comment