राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका - डॉ. अतुल कृष्ण
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठः स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के शिक्षक क्लब एवं विद्यार्थी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा का पर्व विचार गोष्ठी एवं विशेष व्याख्यान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं गुरु वंदना के साथ की गई। इस अवसर पर सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण, विश्वविद्यालय के सम-कुलाधिपति मेज.जन. (डॉ.) जी.के. थपलियाल, एसएम, (सेनि.), कुलपति प्रो.(डॉ.) मुनीश सी. रेड्डी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो.(डॉ.) शल्या राज, शिक्षक क्लब के अध्यक्ष प्रो.(डॉ.) प्रदीप राघव एवं विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को इस दिवस के प्रारंभ के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने अपने संबोधन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में हर परिस्थिति को एक चुनौती के रूप में लेकर दृढ़ संकल्प के साथ उसका मुकाबला करना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. अतुल कृष्ण ने अपने जीवन में मिले सभी गुरुओं को नमन किया और अपने गुरु डॉ. वी.एन. मिश्रा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि आज मैं जो भी हूं वह डॉ. मिश्रा के कारण ही हूं। इस दौरान अपने संबोधन में डॉ. अतुल ने तथागत बुद्ध के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि गुरु का काम केवल शिक्षा देना ही नहीं अपितु सही शिक्षा देना, सत्य को स्वीकार करते हुए विद्यार्थियों के मन में शोध के प्रति रुचि पैदा कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शोध हेतु प्रेरित करना, उनकी प्रतिभा का विकास करना, विद्यार्थियों की पारिवारिक स्थिति को समझते हुए उन्हें एक सही मार्ग पर ले जाना भी है। आगे बोलते हुए डॉ. अतुल ने कहा कि राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा को बनाए रखते हुए राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम का भाव अपने मन में रखना चाहिए। हम सभी को सदा सच्चाई, ईमानदारी और राष्ट्रीयता के मार्ग पर चलना चाहिए। हमारे मन में सद्चरित्र और सद्गुणों के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
वहीं कार्यक्रम के शुरुआत में सुभारती विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो.(डॉ.) शल्या राज ने अपने संबोधन में जीवन में गुरुओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि, जीवन में गुरु केवल वही व्यक्ति नहीं जो हमें किताबी ज्ञान देते हैं बल्कि वो हर व्यक्ति जो हमें जीवन के पथ पर चलते हुए जीवन मूल्यों को सिखाता है वो गुरु है। उन्होंने सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी शिक्षाविद् डॉ. अतुल कृष्ण के जीवन और उनके आदर्शों को अपनाने और राष्ट्रसेवा के प्रति सदैव अग्रसर रहने का आह्वान किया। डॉ. शल्या राज ने सभी शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की ओर से सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण का धन्यवाद करते हुए कहा कि आज जो सु सुभारती समूह खड़ा है और हम सभी यहां पठन-पाठन करते हुए भी राष्ट्र निर्माण में अपनी सहभागिता दे रहे हैं ये हमारे संस्थापक महोदय की दूरदृष्टि एवं राष्ट्रवादी सोच का परिणाम है। डॉ. अतुल हमें समय-समय पर राष्ट्र निर्माण एवं शिक्षकों की राष्ट्र तथा विद्यार्थियों के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराते हैं जोकि केवल एक गुरु ही कर सकता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) मुनीश सी. रेड्डी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में हर छोटी बड़ी सीख देने वाला व्यक्ति हमारे लिए गुरु के समान होता है और आज गुरु पूर्णिमा के इस अवसर पर हमें अपने अहंकार को त्याग कर उन सभी को दिल से धन्यवाद करते हुए उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट करना चाहिए। एक शिक्षक के तौर पर हमें सदा अपने विद्यार्थियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग रहते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए उनको तैयार करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने सभी शिक्षकों को गुरु पूर्णिमा की बधाई देते हुए सभी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
सुभारती विश्वविद्यालय के सम-कुलाधिपति मेज.जन. (डॉ.) जी.के. थपलियाल, एसएम, (सेनि.) ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रसिद्ध पंक्तियों ह्लकर्ता करे न कर सके, गुरु करे सब होय। सात द्वीप नौ खंड में, गुरु से बड़ा न कोयह्व से करते हुए कहा कि गीता में भी कहा गया है कि जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण और जहाँ गांडीवधारी अर्जुन हैं, वहीं श्री (समृद्धि), विजय, विभूति (ऐश्वर्य) और ध्रुवा नीति (अचल धर्म)निश्चित रूप से मौजूद हैं। ऐसे ही हमारे संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण जहां उपस्थित हों वहां पर ज्ञान, राष्ट्रप्रेम, संस्कार व सेवा भाव रुपी सदगुणों के साथ प्रेम, मैत्री, करुणा, सदभाव एवं सामंजस्य रुपी श्री, विजय, विभूति और ध्रुवा नीति का भंडार हमेशा भरा रहेगा।
इस अवसर पर ललित कला संकाय के पर्फोमिंग आर्टस विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) भावना ग्रोवर और उनकी टीम के निर्देशन में संकाय के विद्यार्थियों द्वारा गुरुओं के प्रति सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया जिसको सभी ने मुक्तकंठ से सराहा। वहीं विद्यार्थी परिषद की पूर्व सदस्या डॉ. आस्था गुप्ता ने स्वागत संबोधन देते हुए सभी शिक्षकों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों के जीवन में गुरु के महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। शिक्षक क्लब के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव ने सभी का आधिकारिक धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी से कहा कि हमें डॉ. अतुल कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने सुभारती समूह के सभी पदाधिकारियों एवं शिक्षकों को इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।
इस दौरान प्रो.(डॉ.) एम के मित्तल, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो.(डॉ.) सरताज अहमद, डॉ. मोनिका मेहरोत्रा, डॉ. श्वेता भारद्वाज, कैप्टन (डॉ.) गीता परवंदा (सेनि.) डॉ. सौकिन्द्र कुमार, डॉ. वैभव गोयल भारतीय, डॉ. सुधीर त्यागी, कर्नल राजेश त्यागी (सेनि.), डॉ. मनोज कपिल, डॉ. रविंद्र कुमार जैन, प्रो.आर.पी.सिंह, डॉ. पिंटू मिश्रा, प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, डॉ. धीरेन अजित नायर, डॉ. तारकनाथ प्रसाद, डॉ. पंकज किशोर मिश्रा, डॉ. इंद्रनील बोस, डॉ. सुभाष चंद्र तिवारी, डॉ. रेणु मावी, डॉ. शशिराज तेवतिया, डॉ. अमित कुमार, डॉ. गौरव, डॉ. अमित गोयल, डॉ. प्रीती, रामप्रकाश तिवारी, आदि विश्वविद्यालय के सभी संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे।
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