तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ में आवास विकास परिषद की ओर से की जा रही कार्रवाई पर अब निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
एक तरफ विभाग 661/6 पर ध्वस्तीकरण, 44 परिसरों पर सीलिंग और बाद में 817 निर्माणों पर कार्रवाई के आदेशों का हवाला दे रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई चुनिंदा तरीके से की जा रही है। कहीं सख्ती तो कहीं पूरी तरह से लापरवाही बरती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जागृति विहार सेक्टर-5 स्थित मकान नंबर 380/5, 383/5 जो पानी की टंकी के निकट है, तथा 474/5 जिसे आवास विकास में कार्यरत ब्रह्म सिंह का मकान बताया जा रहा है, इन निर्माणों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
आरोप है कि इन भवनों में निर्धारित सेटबैक, नक्शा और अन्य भवन निर्माण मानकों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी आज तक निष्पक्ष जांच नहीं की गई। यदि इनमें मानकों का उल्लंघन है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि ये निर्माण नियमानुसार हैं तो विभाग को इसकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।
नागरिकों का कहना है कि कानून का उद्देश्य सभी के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है। जब एक ही क्षेत्र में कुछ लोगों पर कार्रवाई होती है और कुछ पर नहीं, तो प्राधिकरण की मंशा पर सवाल उठना लाजमी है।
लोगों ने मांग की है कि आवास विकास परिषद इन सभी संदिग्ध निर्माणों की पारदर्शी जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या विभाग से जुड़ा व्यक्ति।
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