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Friday, July 3, 2026

अस्थमा, टीबी और पल्मोनरी रोगों पर विशेषज्ञों का मंथन, इंदौर में आज से ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड काॅन्फ्रेंस; दुनिया भर के विशेषज्ञ होंगे शामिल

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर बढ़ते वायु प्रदूषण, बदलती जीवनशैली, धूम्रपान और श्वसन संबंधी बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच इंदौर अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा कॉन्फ्रेंस का केंद्र बनने जा रहा है। शहर में 3 से 5 जुलाई तक चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस (BWC-2026) का आयोजन होगा, जिसमें भारत सहित विभिन्न देशों के फेफड़ा रोग विशेषज्ञ, क्रिटिकल केयर डॉक्टर्स, थोरैसिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा डॉक्टर हिस्सा लेंगे।


तीन दिनी यह इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगी। इसकी शुरुआत 3 जुलाई को विशेष प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स के साथ होगी, जिनमें प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों और उपचार पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।


कॉन्फ्रेंस अस्थमा, क्षय रोग (टीबी), पल्मोनरी फाइब्रोसिस, स्लीप मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन और अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। विशेषज्ञ अपने शोध, अनुभव और उपचार की नई पद्धतियों को साझा करेंगे, जिससे चिकित्सकों को वैश्विक स्तर पर हो रहे नवाचारों की जानकारी मिल सके।


युवाओं में बढ़ती फेफड़ों की बीमारियां चिंता का विषय

कॉन्फ्रेंस आयोजन सचिव प्रो.डॉ. रवि डोसी ने बताया कि फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। प्रदूषण, धूम्रपान और बदलती जीवनशैली के कारण युवाओं में भी श्वसन रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों के अनुभव और वैज्ञानिक शोधों का आदान-प्रदान बेहतर उपचार और रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।


11 एडवांस्ड वर्कशॉप्स रहेंगी आकर्षण का केंद्र इस वर्ष कॉन्फ्रेंस की प्रमुख विशेषता 11 उन्नत प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स होंगी। इनमें इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी की पांच विशेष कार्यशालाओं के साथ पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, गंभीर अस्थमा, टीबी प्रबंधन, पल्मोनरी रिसर्च और रिहैबिलिटेशन जैसे विषय शामिल हैं। प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग और जटिल चिकित्सीय प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।


टीबी स्पेशल सेशन

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) को लेकर एक स्पेशल भी आयोजित किया जाएगा। इसमें टीबी नियंत्रण की नई रणनीतियों, ड्रग रेजिस्टेंट टीबी, आधुनिक जांच तकनीकों और जटिल मरीजों के उपचार पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। यह सत्र टीबी मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है।


युवा डॉक्टरों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच

कॉन्फ्रेंस में देशभर से 100 से अधिक स्नातकोत्तर छात्र अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे, जबकि 30 से अधिक टीमें मेडिकल क्विज प्रतियोगिता में भाग लेंगी। रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा।


चिकित्सा जगत की प्रमुख हस्तियां रहेंगी मौजूद

कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन प्रो. महेंद्र के. बैनारा हैं, जबकि डॉ. अपार जिंदल वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष हैं। डॉ. सलिल भार्गव और डॉ. लोकेन्द्र दवे आयोजन के संरक्षक हैं।

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