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Saturday, July 4, 2026

पोलैंड में आयुर्वेद व योग के क्षेत्र में सहयोग की दिशा में सीसीएसयू के प्रतिनिधि मंडल की अहम बैठक , एमओयू की संभावनाओं पर हुई चर्चा



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व में पोलैंड दौरे पर गए विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने वारसॉ स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से भारत की राजदूत सुश्री नीता भूषण एवं श्री संदीप कुमार की अनुशंसा पर पोलिश मॉडर्न आयुर्वेद फाउंडेशन की अध्यक्ष मोनिका कारोलेचुक तथा अंतरराष्ट्रीय एवं शैक्षणिक सहयोग समन्वयक जोलांटा रिबार्चिक के साथ विस्तृत बैठक की। इस दौरान आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा तथा शैक्षणिक सहयोग के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में उच्च विद्यालय के शोध निदेशक प्रोफेसर बीरपाल सिंह एवं प्रोफेसर जितेंद्र कुमार सिंह उपस्थित रहे। उपस्थित रहे।


बैठक में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि योग और आयुर्वेद की मूल जड़ें भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़ी हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निकट मेरठ में स्थित है तथा हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे विश्वप्रसिद्ध योग एवं आयुर्वेद केंद्रों के समीप होने के कारण इस विरासत से स्वाभाविक रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में योग विभाग संचालित है, जहां योग शिक्षा के साथ-साथ नियमित निःशुल्क योगशाला का संचालन किया जाता है तथा योग एवं प्राकृतिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की जानकारी देते हुए आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।


बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भविष्य में शैक्षणिक आदान-प्रदान, संयुक्त शोध, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के विनिमय कार्यक्रम तथा आयुर्वेद एवं योग के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए जाने की संभावनाओं पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधिमंडल ने पोलिश मॉडर्न आयुर्वेद फाउंडेशन के साथ दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की, जिस पर दोनों पक्षों ने सहमति जताते हुए आगे आवश्यक विचार करने का निर्णय लिया। कुलपति ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर नई पहचान देने के साथ-साथ विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी नए अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

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