डाॅ. इफ्फत जकिया
नित्य संदेश, मेरठ। 4 मुहर्रम 1448 हिजरी, शहर के सभी इमामबाड़ों में इमाम हुसैन ( अ.स) की अज़ादारी का सिलसिला जारी रहा। इमामबारगाह छोटी कर्बला में अशरे को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद अब्बास बाकरी ने "इमामत, ईलाही निज़ाम - ए - हयात" शीर्षक के तहत लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि "अल्लाह तआला ने इंसानियत के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, विकास और पूर्णता के लिए इमाम (अ.स.) भेजे। इमामों (अ.स.) ने इंसान को उसकी असली कीमत और हैसियत से अवगत कराया और उसके अंदर छिपी काबिलियत को जगाकर इंसानियत की पूर्णता का रास्ता दिखाया।
मौलाना ने आगे कहा कि इमामत का सिस्टम असल में इंसान को बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाने का एक ईश्वरीय तरीका है, जिसके ज़रिए समाज को न्याय, ज्ञान और इंसानियत के ऊंचे मूल्यों से परिचित कराया जाता है। मजलिस के आखिर में मौलाना ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के वफ़ादार साथी, हज़रत ज़ुहैर बिन क़ैन (अ.स.) की दर्दनाक शहादत बयान कीं, जिन्हें सुनकर मजलिस में मौजूद सोगवारों की आँखों में आँसू आ गए और हर तरफ़ मातम का माहौल बन गया। श्रोता भावुक हो गए। मजलिस में सोज़ ख्वानी दानिश मेरठी ने की।
नमाज ज़ौहरैन के बाद अज़ा खाना शाह - ए - कर्बला वक्फ मंसबिया में "इमामत और कुरान" शीर्षक के आधार पर मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी ने मजलिस को संबोधित किया। मजलिस में सोज़ ख्वानी अज़ादार हुसैन ने की। शहर की दूसरी इमामबारगाहों में भी निर्धारित समय पर मजलिसों का सिलसिला जारी रहा।
नमाज मग़रिबैन के बाद थाना देहली गेट स्थित अज़ाखाना डॉ. मुहम्मद इकबाल से अलम का जुलूस निकाला गया, जिसका आयोजन शाह अब्बास सफवी ने किया। जुलूस देर रात छोटी कर्बला इमामबारगाह पहुंचकर सम्पन्न हुआ। शहर की मातमी अंजुमनों ने नौहा ख्वानी और मातम किया। मुहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने पत्रकारों को बताया कि कल जुल्जनाह का जुलूस थाना कोतवाली स्थित बड़ा इमाम बाड़ा नवाब मौहम्मद अली खाँ से निकाला जाएगा, जो शहर की विभिन्न इमामबारगाहों से होता हुआ बुढ़ाना गेट स्थित इमामबारगाह पर वापस आकर समाप्त होगा।

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