नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के वैज्ञानिकों ने विश्व के अग्रणी शोधकर्ताओं के साथ मिलकर अगली पीढ़ी की पेरोव्स्काइट फोटोडिटेक्टर तकनीक पर एक महत्वपूर्ण शोध कार्य किया है। यह शोध भविष्य में स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च गति संचार जैसी आधुनिक तकनीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।
विश्वभर के वैज्ञानिक पेरोव्स्काइट फोटोडिटेक्टर नामक अत्याधुनिक तकनीक पर तेजी से कार्य कर रहे हैं, प्रतिष्ठित शोध पत्रिका Carbon Energy (Impact Factor=24.2) of Wiley Publication में प्रकाशित एक नवीन समीक्षा शोध के अनुसार, यह तकनीक अगली पीढ़ी के बुद्धिमान प्रकाश-संवेदी उपकरणों का आधार बनने की क्षमता रखती है। पारंपरिक सिलिकॉन आधारित प्रकाश सेंसरों की तुलना में पेरोव्स्काइट फोटोडिटेक्टर अधिक संवेदनशील, तेज़ प्रतिक्रिया देने वाले तथा कम ऊर्जा की खपत करने वाले होते हैं। ये पराबैंगनी (UV), दृश्य (Visible) और निकट-अवरक्त (Near Infrared) प्रकाश तक का प्रभावी ढंग से पता लगा सकते हैं। इनका निर्माण अपेक्षाकृत कम लागत वाली तकनीकों से संभव है, जिससे भविष्य में लचीले (Flexible), हल्के तथा पहनने योग्य (Wearable) इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विकसित किए जा सकेंगे। शोध के अनुसार, पेरोव्स्काइट फोटोडिटेक्टर पारंपरिक सिलिकॉन आधारित सेंसरों की तुलना में अधिक संवेदनशील, तेज़ प्रतिक्रिया देने वाले तथा कम ऊर्जा की खपत करने वाले हैं। इनका उपयोग स्मार्टफोन, चिकित्सा उपकरणों, स्वचालित वाहनों, पर्यावरण निगरानी, उपग्रह संचार, सुरक्षा प्रणालियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्मार्ट उपकरणों में किया जा सकेगा।
इस अहम काम के लिए सात देशों (भारत, मलेशिया, चीन, ग्रीस, स्वीडन, स्विट्जरलैंड और चेक गणराज्य) के वैज्ञानिक शामिल हैं। इसमें भारत के CCS यूनिवर्सिटी, मेरठ के 3 वैज्ञानिक (दीपक कुमार, नैनी जैन, प्रो. संजीव कुमार शर्मा) हैं। इस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व भारत से प्रो. संजीव कुमार शर्मा, मलेशिया से प्रो. राशिद यूसुफ, ग्रीस से प्रो. मारिया वासिलोपोलू तथा चीन से प्रो. हाओतोंग वेई ने किया। यह बहुराष्ट्रीय सहयोग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। हालाँकि, बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग से पहले इनकी दीर्घकालिक स्थिरता, नमी एवं ताप के प्रति प्रतिरोध, सीसा (Lead) के सुरक्षित विकल्प तथा बड़े स्तर पर उत्पादन जैसी चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।
सीसीएस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि न केवल भारत के वैज्ञानिक समुदाय के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारतीय शोधकर्ता वैश्विक स्तर पर उन्नत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। यह उपलब्धि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को नई पहचान प्रदान करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इन चुनौतियों को दूर किया जा सकेगा। आने वाले वर्षों में पेरोव्स्काइट फोटोडिटेक्टर स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्मार्ट डिजिटल भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल और बुद्धिमान तकनीकों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।



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