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Wednesday, June 24, 2026

अक्षर-आलोक का आयोजन संपन्न

नित्य संदेश, भोपाल। बाल साहित्य शोध सृजन पीठ ने आज नवाचार की ऋंखला को आगे बढ़ाते हुए अक्षर-आलोक का आयोजन किया। इस आनलाईन कार्यक्रम में बाल साहित्य के पुरोधा आदरणीय डॉ विकास दवे जी, निदेशक साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश शासन, भोपाल की एक बाल कहानी परीक्षा का पाँच अधयेताओं प्रेक्षा सक्सेना, शालिनी खरे, प्रतिभा श्रीवास्तव, मृदुल त्यागी एवं सुसंस्कृति सिंह द्वारा पठन किया गया। तत्पश्चात पटल पर उपस्थित सभी बाल साहित्यकारों द्वारा उस कहानी पर अपने विचार रखे गये। कार्यक्रम के अंत में डाॅ विकास दवे जी ने इस बाल कहानी को संदर्भ में रखते हुए कहानी लेखन के पाँच महत्वपूर्ण बिंदुओं को अनेक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया। देश काल परिस्थिति, हर संदर्भित जीव की भूमिका और सारतत्त्व की विस्तार से चर्चा आपने प्रस्तुत की। कहानी का उद्देश्य और संदेश को किस तरह से कहानी के ताने बाने में प्रस्तुत किया जाता है यह भी आपने बताया। आपने कहा हर व्यक्ति का अपना जीवन, अपनी सोच, अपना महत्व एवं अपना निर्णय होता है और सभी के सहयोग से सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति आसान हो जाती है। कहानी का संदेश है कि परीक्षा कभी भी बाह्य रंग रूप के आधार पर नहीं बल्कि आंतरिक गुण एवं क्षमताओं व व्यवहार के आधार पर करना ही सर्वोत्तम होता है।

आज की इस सफल पुस्तक अध्ययन शाला, समीक्षा की कार्यशाला बहुत ही ज्ञानवर्धक रही।


डॉ विकास दवे ने इस आनलाईन कार्यक्रम 'अक्षर-आलोक' को बाल साहित्य शोध सृजन पीठ का पाठक मंच कह कार्यक्रम की अत्यधिक सराहना करते हुये कहा कि संपूर्ण साहित्य जगत मेरा परिचय मेरी उपलब्धियों के रूप में करवाता है मगर आज के इस कार्यक्रम ने आप लोगों को  एक साहित्यकार के रूप में आज मेरा परिचय कराया है।


कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की निदेशक डॉ मीनू पांडेय द्वारा किया गया।


इस कार्यक्रम में अतिथि, लेखक एवं अध्येताओं के अलावा कई बाल साहित्यकार भी श्रोता के रूप में उपस्थित रहे।



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