नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) ने टोक्यो स्थित एक ग्लोबल ह्यूमन रिसोर्स और इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट फर्म, फोर्थ वैली कंसीयर्ज कॉर्पोरेशन (एफवीसीसी) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी का उद्देश्य जापान में भारतीय टैलेंट के लिए वर्कफोर्स मोबिलिटी के अवसरों को मज़बूत और उन्हें आसान बनाना है। यह साझेदारी जापानी वर्कफोर्स में शामिल होने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के सीईओ अरुण कुमार पिल्लई ने कहा, “भारत के इंटरनेशनल वर्कफोर्स मोबिलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने और भारतीय टैलेंटमें विदेशी एम्प्लॉयर्स का भरोसा बढ़ाने के लिए एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर अलाइन्ड वेरिफिकेशन सिस्टम बनाना ज़रूरी है। यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर रोज़गार के अवसर तलाश रहे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार रास्ते बनाने के प्रति एनएसडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
फोर्थ वैली कंसीयर्ज कॉर्पोरेशन (एफवीसीसी) के संस्थापक और सीईओ योहेई शिबासाकी ने कहा, “भारतीय प्रोफेशनल्स अत्यधिक कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं और एक मज़बूत विश्वसनीयता वेरिफिकेशन फ्रेमवर्क के ज़रिए, हमारा लक्ष्य जापानी एम्प्लॉयर्स का भरोसा और बढ़ाना है और साथ ही जापान में भारतीय प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण और लॉन्ग-टर्म अवसर पैदा करना है। यह साझेदारी, ज़िम्मेदार और सस्टेनेबल इंटरनेशनल वर्कफोर्स इंटीग्रेशन को सक्षम करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
यह कोलैबोरेशनएनएसडीसी के एक समूह संगठन एनएसडीसी ट्रस्ट द्वारा प्रदान किए गए “क्रेडिबिलिटी चेक” फ्रेमवर्कका लाभ उठाएगा,ताकि एफवीसीसी के माध्यम से जापान जाने वाले भारतीय उम्मीदवारों के लिए एक व्यवस्थित और विश्वसनीय वेरिफिकेशन मैकेनिज्म स्थापित किया जा सके। एक पारदर्शी और विश्वसनीय वेरिफिकेशन इकोसिस्टम बनाकर, इस सहयोग का उद्देश्य एम्प्लॉयर के विश्वास को बढ़ाना और जापानी कार्यबल इकोसिस्टम के भीतर भारतीय टैलेंट की लॉन्ग टर्म रोजगार क्षमता, स्वीकार्यता और पहचान को मजबूत करना है।
फ्रेमवर्क के तहत, वेरिफिकेशन प्रक्रिया में आइडेंटी वेरिफिकेशन, शैक्षिक और योग्यता संबंधी प्रमाण-पत्रों का वेरिफिकेशन, एम्प्लॉयमेंट हिस्ट्री वेरिफिकेशन, जहाँ कानूनी रूप से अनुमति हो वहाँ आपराधिक पृष्ठभूमि की जाँच, जमा किए गए दस्तावेज़ों की एकरूपता की जाँच और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए अन्य क्रेडिबिलिटी असेसमेंट पैरामीटर शामिल हो सकते हैं। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब जापान में श्रमिकों की कमी लगातार बढ़ रही है और विदेशी प्रतिभाओं की मांग में भी वृद्धि हो रही है। वहीं दूसरी ओर एम्प्लॉयर और इंस्टीट्यूशन ऑथेंटिसिटी, कम्प्लायंस और जिम्मेदार वर्कफोर्स इंटीग्रेशन पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं।
वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान, भारत और जापान ने अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की पुनः पुष्टि की, जिसमें लोगों के बीच आदान-प्रदान द्विपक्षीय सहयोग के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरा। दोनों देशों ने इंडिया-जापान ह्यूमन रिसोर्स को एक्सचेंज करने और सहयोग के लिए एक कार्ययोजना भी तैयार की, जिसका व्यापक लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में कम से कम 50,000 स्किल्ड भारतीय प्रोफेशनल्स को जापान भेजने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। भारत-जापान के इस व्यापक विज़न के अनुरूप, एनएसडीसी और एफवीसीसी के बीच यह सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद, पारदर्शी और सुगम टैलेंट मोबिलिटी इकोसिस्टम बनाने में योगदान मिलने की उम्मीद है।

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