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Wednesday, May 20, 2026

"माखन के लाल' नए विद्यार्थियों के लिए एमसीयू के असली "हीरो''

नित्य संदेश ब्यूरो 

-कुलगुरु ने कहा कि पहले बैच ने मीडिया में कॅरिअर की एक मजबूत आधारशिला रखी।


-"माखन के लाल' में छपी हैं 50 से अधिक विद्यार्थियों के संघर्ष की कहानियाँ।


-नई कहानियों के साथ "माखन के लाल" के अगले संस्करण की तैयारी।

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में नवाचारों की श्रृंखला में वर्ष 2026-2027 के लिए एडमिशन की प्रक्रिया के दौरान अगली कड़ी में हाल ही में लोकार्पित पुस्तक 'माखन के लाल' के संस्मरण लेखक पूर्व विद्यार्थियों को उनके संघर्ष और उपलब्धियों के आधार पर नए विद्यार्थियों के लिए अपना असली हीरो माना है। 


मीडिया हेड डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने बताया कि हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के ऐतिहासिक प्रसंग पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित "माखन के लाल' विश्वविद्यालय की 36 वर्ष की यात्रा में निकले मेधावी विद्यार्थियों का एक विहंगावलोकन प्रस्तुत करती है। देश भर से पढ़ने आए 50 से अधिक विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए गए हैं। इनके संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देते हुए नए सत्रों में आने वाले ऐसे ही विद्यार्थियों के लिए इनकी कहानियाँ प्रेरणा की मिसाल हैं। 


उन्होंने बताया कि इसी सकारात्मक दृष्टिकोण से पहले बैच 1991-1992 के विद्यार्थी संजय सलिल, पदम प्रसाद भंडारी, संजीव शर्मा, प्रकाश पंत, रीमा दीवान चड्ढा और दीपक पगारे जैसी मीडिया विभूतियों को सफलता के नायक के रूप में परिचित कराया जा रहा है, जिन्होंने विभिन्न समाचार माध्यमों में अपनी सेवाएँ देते हुए समाज में अपना प्रतिष्ठित स्थान बनाया है। वे अपनी सेवाओं के दौरान देश भर में घूमते रहे हैं। इसी कड़ी में बाद के वर्षों में निकले और "माखन के लाल' में प्रकाशित अन्य विद्यार्थियों को भी यह सम्मान दिया गया है। यह एक प्रकार से आगामी सत्र में विश्वविद्यालय की पहल पर होने वाली एलुमनाई मीट की तैयारी है।


कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा है कि हर तरफ और हर समय अनिश्चितताओं से घिरे मीडिया जगत में टिकना आसान नहीं था। पहले बैच ने यह आधारशिला एक ऐसे समय रखी, जब मीडिया में कोई ग्लैमर नहीं था। चौबीस घंटे के चैनल नहीं आए थे। केवल अखबार या पत्रिकाएँ थे। वेतन नाममात्र का मिलता था। बाद के सत्रों में आए विद्यार्थियों ने अपने बूते अपने संघर्ष से मीडिया में अपना स्थान बनाने की इसी परंपरा का निर्वहन किया। नए विद्यार्थियों के लिए "माखन के लाल' कॅरिअर की एक गाइड बुक बन गई है। नई कहानियों के साथ अगले सत्र में इसका नया संस्करण भी आएगा। उन्होंने मीडिया में कार्यरत पूर्व विद्यार्थियों से कहानियाँ लिख भेजने का आग्रह किया है।


प्रो. पवित्र श्रीवास्तव

विभागाध्यक्ष

विज्ञापन एवं जनसम्पर्क विभाग




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