नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। नई पीढ़ी को भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक कला से जोड़ने के उद्देश्य से मराठी सोशल ग्रुप द्वारा आयोजित चार दिवसीय लोककला एवं लोकनृत्य कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। कार्यशाला में प्रतिभागियों को मराठी लोककला एवं विभिन्न लोकनृत्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोकनृत्य एवं कथ्थक गुरु संजय महाजन रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि लोकनृत्य और लोककला जीवन की व्यस्तता के बीच शीतल फुहार की तरह आनंद प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रांत के लोकनृत्य की बारीकियों, उसकी भाषा और उसके अर्थ को समझना आवश्यक है।
उन्होंने घूमर नृत्य का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्षों पहले जब सेफ्टी पिन का आविष्कार भी नहीं हुआ था, तब भी महिलाएं इतनी कुशलता से लोकनृत्य प्रस्तुत करती थीं कि उनकी वेशभूषा पूरी तरह व्यवस्थित रहती थी। यही लोककला की विशेषता और अनुशासन है, जिसे सीखना जरूरी है।
कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को गणपति स्तवन के साथ कातकरी एवं कोळी नृत्य का प्रशिक्षण दिया गया।
अतिथियों का स्वागत कार्यशाला संयोजिका ज्योत्स्ना सोहनी एवं तृप्ति महाजन ने किया। वहीं सुधीर दांडेकर और राजेश शाह ने शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथियों का सम्मान किया।
ज्योत्स्ना सोहनी ने बताया कि कार्यशाला को अपेक्षा से अधिक उत्साहजनक प्रतिसाद मिला है। जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में प्रतिभागियों की संख्या निर्धारित 30 से बढ़ाकर 50 करनी पड़ी। कार्यक्रम का संचालन हर्षवर्धन लिखिते ने किया।


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