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Thursday, May 7, 2026

सोफिया शिरीं की कहानियों में प्रतिरोध भी है और वर्तमान समय के प्रश्न भी: प्रोफेसर सगीर अफ़राहीम

सीसीएस यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में सोफिया शिरीं के अफ़साना-संग्रह “ब्लैक रिबन” का ऑनलाइन लोकार्पण एवं परिचर्चा

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। सोफिया शिरीं ने जिस तरह अपने अफ़सानों में वर्तमान समय और सामाजिक समस्याओं को प्रस्तुत किया है, वह अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अफ़सानों में प्रतिरोध की आवाज़ भी है और आज के दौर की समस्याओं का यथार्थ चित्रण भी मिलता है। ये विचार प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रोफेसर सगीर अफ़राहीम ने उर्दू विभाग और आयुसा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम "अदबनुमा" में सोफिया शिरीं के अफ़साना-संग्रह “ब्लैक रिबन” के लोकार्पण एवं परिचर्चा के अवसर पर अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सोफिया शिरीं ने नई सदी की त्रासदी, सामाजिक अँधेरे और मानवीय पीड़ा को बेहद सादगी और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

कार्यक्रम का शुभारंभ सईद अहमद द्वारा पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ। कार्यक्रम की सरपरस्ती प्रसिद्ध आलोचक, अफ़साना-निगार और उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने की, जबकि अध्यक्षता प्रोफेसर सगीर अफ़राहीम ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अमीर महदी (इंग्लैंड) और डॉ. रियाज़ तौहीदी (कश्मीर) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध कथाकार अज़ीमुल्लाह हाशमी और साहित्यकार इरशाद शफ़क़ शामिल हुए। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में प्रोफेसर रेशमा परवीन मौजूद रहीं। स्वागत एवं परिचयात्मक वक्तव्य डॉ. इरशाद सियानवी ने प्रस्तुत किया तथा संचालन डॉ. इम्तियाज़ अलीमी ने किया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सोफिया शिरीं के अफ़साना-संग्रह “ब्लैक रिबन” का लोकार्पण भी किया गया।

अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने कहा कि उर्दू विभाग और आयुसा का उद्देश्य नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना तथा उन्हें एक उपयुक्त मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सोफिया शिरीं के अफ़सानों में अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध और सामाजिक समस्याओं की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। डॉ. इरशाद सियानवी ने सोफिया शिरीं का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि नई सदी के महत्वपूर्ण फिक्शन लेखकों में उनका नाम शामिल है। वे एक सफल अफ़साना-निगार होने के साथ-साथ शिक्षण कार्य से भी जुड़ी हुई हैं और उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इरशाद शफ़क़ ने कहा कि बंगाल में महिला अफ़साना-निगारों की कमी रही है, लेकिन सोफिया शिरीं लगातार साहित्यिक सेवाएँ दे रही हैं और विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।

अज़ीमुल्लाह हाशमी ने कहा कि “ब्लैक रिबन” में यथार्थवाद की सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है। सोफिया शिरीं ने प्रतिरोध और वास्तविकता को अपने अफ़सानों का विषय बनाया है। उनके अफ़सानों का दायरा देश से लेकर विदेशों तक फैला हुआ है और हर पात्र प्रभावशाली ढंग से अपनी भूमिका निभाता है। मुख्य अतिथि अमीर महदी ने कहा कि अफ़साने की शुरुआत और समापन किस प्रकार किया जाए, यह कला सोफिया शिरीं को भली-भाँति आती है। उनकी अफ़साना-निगारी यथार्थवाद का सुंदर उदाहरण है।

एवोसा की अध्यक्ष प्रोफेसर रेशमा परवीन ने कहा कि सोफिया शिरीं की कहानियों में सवाल भी हैं और वर्तमान समय की परिस्थितियाँ एवं समस्याएँ भी। उनकी कहानियों की संरचना और शैली अत्यंत प्रभावशाली है। इस अवसर पर लेखिका सोफिया शिरीं ने अपने अफ़साने “ब्लैक रिबन” का पाठ किया, जबकि डॉ. रियाज़ तौहीदी ने “ब्लैक रिबन संग्रह का आलोचनात्मक अध्ययन” विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में प्रोफेसर गुलाम रब्बानी, डॉ. अरशद इकराम, प्रोफेसर ज़ैन रामिश, डॉ. रमीशा क़मर, डॉ. आसिफ अली, डॉ. शादाब अलीम, डॉ. अलका वशिष्ठ, सैयदा मरियम इलाही, फरहत अख्तर, मोहम्मद शमशाद तथा अन्य छात्र-छात्राएँ ऑनलाइन जुड़े रहे।

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