नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा सेठ बी.के. माहेश्वरी गर्ल्स इंटर कॉलेज में एक प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों, साइबर सुरक्षा, अपराध रोकथाम तथा जिम्मेदार नागरिकता के प्रति जागरूक करना था।
यह जागरूकता शिविर सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक राजेश चन्द्रा (पूर्व-न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन एवं प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्षा, सुभारती लॉ कॉलेज के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन लॉ क्लब की संयोजिका डॉ. सारिका त्यागी के समन्वय में संपन्न हुआ। डॉ. सारिका त्यागी ने बताया कि इस शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्राओं के बीच विधिक साक्षरता को बढ़ावा देना तथा उन्हें उनके मौलिक अधिकारों, संवैधानिक प्रावधानों एवं समाज में जिम्मेदार नागरिक की भूमिका के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि आज के समय में विधिक जानकारी केवल कानून के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी होना आवश्यक है।
कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई ने शिक्षिकाओं एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए उनके विधिक एवं संवैधानिक अधिकारों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने बालिकाओं को महिला अधिकारों, शिक्षा के अधिकार, समानता के अधिकार एवं संवैधानिक सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। साथ ही उन्होंने विधि क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं की भी विस्तृत जानकारी देते हुए छात्राओं को न्याय एवं कानून के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण आईपीएस विनायक गोपाल भोसले, एसपी सिटी, मेरठ रहे, जिन्होंने छात्राओं को अपराध रोकथाम, व्यक्तिगत सुरक्षा एवं सामाजिक जागरूकता के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने छात्राओं को सतर्क, आत्मविश्वासी एवं जागरूक रहने का संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को साइबर सुरक्षा के प्रति सचेत रहना आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों जैसे ऑनलाइन फ्रॉड, फेक लिंक, सोशल मीडिया हैकिंग, डिजिटल ठगी एवं साइबर बुलिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को बताया कि यदि कोई व्यक्ति डिजिटल अपराध का शिकार होता है, तो उसे तत्काल 1930 निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, जिससे समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। उनके व्याख्यान ने छात्राओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति अधिक सजग और जागरूक बनाया।
इस अवसर पर डॉ. अफरीन अल्मास ने भी एक प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों — समानता, स्वतंत्रता, न्याय एवं नागरिक कर्तव्यों — पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छात्राओं को यह समझाया कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अधिकारों एवं कर्तव्यों का मार्गदर्शक है।
डॉ. अफरीन अल्मास ने अपने संबोधन में संवैधानिक मूल्यों को दैनिक जीवन से जोड़ते हुए छात्राओं को समाज के जागरूक, जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। उनके व्याख्यान ने छात्राओं में संविधान के प्रति सम्मान एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और अधिक मजबूत किया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने अत्यंत उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा विभिन्न विधिक, सामाजिक एवं साइबर सुरक्षा संबंधी प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों से संवाद स्थापित किया।
जागरूकता शिविर ने छात्राओं के बीच विधिक चेतना, आत्मविश्वास एवं सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के विधिक जागरूकता कार्यक्रम समाज में कानून के प्रति सम्मान, नागरिक जागरूकता एवं सुरक्षित वातावरण निर्माण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम हैं।



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