नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा संकाय अंतर्गत शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा संकाय के सेमिनार हॉल में “माइक्रो टीचिंग” विषय पर एक प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक अतिथि व्याख्यान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की शिक्षण दक्षताओं, कक्षा संप्रेषण कौशल, शिक्षण तकनीकों तथा शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में व्यावसायिक शिक्षण व्यवहारों को विकसित एवं सुदृढ़ करना था।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रभावी शिक्षण की आधुनिक विधियों एवं व्यवहारिक पक्षों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शारीरिक शिक्षा विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू अधिकारी द्वारा किया गया। उन्होंने विशिष्ट संसाधन वक्ता डॉ. अरुणा सिरोही, एसोसिएट कोच, भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का पारंपरिक रूप से पटका एवं पौधा भेंट कर सम्मान किया तथा उनके प्रति आदर एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक निर्माण की प्रक्रिया में माइक्रो टीचिंग अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं शिक्षण कौशल का विकास करती है।
यह विशेष अतिथि व्याख्यान शारीरिक शिक्षा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकित सिंह जादौन के संयोजन में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सुचारु संचालन एवं सफल आयोजन में उनके प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभाग के अन्य संकाय सदस्य भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे तथा उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
अपने विस्तृत एवं प्रेरणादायी व्याख्यान में डॉ. अरुणा सिरोही ने शिक्षक शिक्षा एवं शारीरिक शिक्षा कार्यक्रमों में माइक्रो टीचिंग की अवधारणा, महत्व, उद्देश्यों एवं विभिन्न तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माइक्रो टीचिंग भावी शिक्षकों को पाठ योजना निर्माण, प्रभावी प्रस्तुतीकरण, पुनर्बलन तकनीक, कक्षा प्रबंधन, प्रश्न पूछने की कला, प्रदर्शन विधियों एवं संप्रेषण कौशल को विकसित करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एक सफल शिक्षक बनने के लिए केवल विषय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी संचार, नेतृत्व क्षमता, विद्यार्थियों को प्रेरित करने की कला तथा कक्षा में सकारात्मक वातावरण निर्माण की योग्यता भी अत्यंत आवश्यक है। माइक्रो टीचिंग इन सभी कौशलों को व्यवहारिक रूप से विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है।
व्याख्यान के दौरान डॉ. अरुणा सिरोही ने व्यावहारिक उदाहरणों एवं संवादात्मक चर्चाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रभावी शिक्षण सत्रों की योजना तैयार करने एवं उन्हें सफलतापूर्वक प्रस्तुत करने की चरणबद्ध प्रक्रिया समझाई। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि माइक्रो टीचिंग आत्मविश्लेषण एवं निरंतर सुधार की प्रक्रिया को मजबूत बनाती है, जिससे शिक्षक अपनी कमियों को पहचान कर उन्हें दूर कर सकते हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह एवं सक्रियता के साथ सहभागिता की। छात्रों ने शिक्षण पद्धतियों, कक्षा व्यवहार, प्रस्तुतीकरण तकनीकों एवं शिक्षक-विद्यार्थी संवाद से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका संसाधन वक्ता ने विस्तार पूर्वक उत्तर दिया। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ, जिससे उनके प्रभावी शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं तथा व्यावसायिक शिक्षक तैयारी के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला। लगभग 55 विद्यार्थियों ने इस विशेष व्याख्यान में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम ने भावी शारीरिक शिक्षा शिक्षकों में शिक्षण अभिरुचि, नेतृत्व क्षमता, संप्रेषण कौशल एवं व्यावसायिक दक्षताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया।
कार्यक्रम के समापन पर शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से विशिष्ट संसाधन वक्ता डॉ. अरुणा सिरोही के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। विभाग ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षणपरक कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


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