नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। लीगल ऐड क्लीनिक, विधि अध्ययन संस्थान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य” विषय पर एक विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के सेमिनार हॉल में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं एवं युवाओं को बाल संरक्षण, कानूनी अधिकारों तथा समाज में बढ़ते बाल अपराधों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान की वरिष्ठ शिक्षिका डॉ॰ सुदेशना एवं लीगल ऐड क्लीनिक के नोडल अधिकारी डॉ॰ विकास कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नोडल अधिकारी डॉ॰ विकास कुमार ने कहा कि “सुरक्षित बचपन किसी भी राष्ट्र की मजबूत नींव होता है। यदि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, उचित शिक्षा और कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा, तभी देश का भविष्य सुरक्षित और सशक्त बन सकेगा।” उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विधिक सहायता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति न्याय तक अपनी पहुंच बना सके। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। डॉ॰ विकास कुमार ने लोक अदालतों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोक अदालतें त्वरित, सस्ती एवं सरल न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे समाज में विधिक जागरूकता फैलाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं तथा लोक अदालतों एवं विधिक सेवा प्राधिकरण की गतिविधियों में सहभागिता करें।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ॰ सुदेशना ने विद्यार्थियों को बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने “पॉक्सो अधिनियम, 2012” (Protection of Children from Sexual Offences Act) की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे में बच्चों को कानूनी संरक्षण प्रदान करना केवल सरकार या न्यायपालिका की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने वाला एक सशक्त कानून है, जिसके माध्यम से पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि यदि किसी भी प्रकार के बाल शोषण या उत्पीड़न की जानकारी मिले तो उसकी तुरंत सूचना संबंधित प्राधिकरण को दी जानी चाहिए, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। डॉ॰ सुदेशना ने यह भी कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवार, शिक्षण संस्थान एवं समाज मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करें। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उनमें आत्मविश्वास विकसित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे किसी भी प्रकार के शोषण के विरुद्ध आवाज उठा सकें। कार्यक्रम का सफल संचालन छात्रा सलोनी सिंह द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन छात्र हरीश कुमार ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में संस्थान के समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे एवं सभी ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।


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