नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। कथाव्यास प्रो. पूनम लखनपाल ने मयूर विहार में प्रो.सुधाकराचार्य त्रिपाठी के आवास पर सामवेद की सप्तमकथा के छठे दिन सामवेद में सोम एवं इन्द्र की स्तुति की और कथा कही।
हे इन्द्र! आप हमारी स्तुतियों से प्रसन्न होइये। यदि तुम हमारे मित्र बन जाते हो तो हमारे कार्यों में अवरोध नहीं हो सकता।हमें आप ऐसा धन दीजिए जिसको ना कोई स्पर्श कर सके, ना ही छीन सके। हे सोम आपके पवित्र रस का रसास्वादन आपके मित्र अर्यमा, मित्र,वरुण आदि भी करें। हर्ष का प्रवाह करते हुये सोम आगे आगे प्रवाहित होते हैं। आप पवित्रता के साथ कलश में स्थापित होते हैं। हमारी दृष्टि पर आने वाले आवरण का इन्द्र ही विनाश करते हैं। सभी इन्द्रियां इन्द्र के नियंत्रण में ही रसास्वादन करें। हमारी बुद्धि कल्याणकारी हो।
हे इन्द्र! शत्रुओं से हमारी रक्षा कीजिये। हम आपको बार बार पुकार रहे हैं। आप सोम का पान कीजिये व हम पर प्रसन्न होइये। हमें धन, सम्पदा,धन,धान्य, पशु, संतान, गाय सबकुछ प्रदान करें। हे सोम आप ज्ञानवान् हैं, प्रकाशवान् हैं सबको साथ लेकर चलने वाले हैं। मदेषु सर्वधा असि। अपार वैभव आपसे ही प्राप्त होता है।आपकी पूर्णता का रसास्वादन हम करें। सोम आत्मदर्शी हैं। स्वयं को जानने वाले हैं। हमें भी स्वयं को देखना चाहिए व अपने आत्मतत्त्व का दर्शन करना चाहिए। हे अग्नि! आपकी शक्तियां हमारे लिए कल्याणकारी हों व हमें बौद्धिक, आत्मिक व भौतिक बल प्रदान कीजिये।

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