नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ के केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस द्वारा अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर एक विशेष शैक्षणिक एवं जागरूकता भ्रमण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉलेज के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने मेरठ जनपद के निकट स्थित आर्द्रभूमि (Wetlands) का भ्रमण कर वहां की जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का गहन अध्ययन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय परिसर से विज्ञान कॉलेज के डीन प्रोफेसर (डॉ.) आर.के. जैन द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों के बीच जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों, पक्षियों, जलीय जीवों तथा आर्द्रभूमि की पारिस्थितिकी को निकट से समझने का अवसर प्राप्त हुआ। छात्रों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी प्राप्त की।
इस कार्यक्रम में संस्थान के लगभग 50 छात्र-छात्राओं एवं 5 संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों का मार्गदर्शन विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. अनुप्रिया राणा एवं सुश्री आंचल शर्मा द्वारा किया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को जैव विविधता के महत्व, आर्द्रभूमि संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मानव की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय डॉ. आदेश कुमार और स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की पर्यावरण समिति (Environmental Committee) के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण उन्हें पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करते हैं, जिससे पर्यावरण के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता और अधिक मजबूत होती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की बात कही, ताकि युवा पीढ़ी को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जा सके।


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