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Saturday, May 23, 2026

एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सुभारती विश्वविद्यालय का अहम कदम

 

5-दिवसीय एफडीपी में 90 संकाय सदस्यों ने लिया भाग, शिक्षा के आधुनिक आयामों पर हुए विशेष सत्र

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर आधारित 5-दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के मदन मोहन मालवीय ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों से 90 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 


कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक सैद्धांतिक ज्ञान, व्यवहारिक कौशल एवं नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाना था। पांच दिनों तक चले इस एफ.डी.पी.  में शिक्षा, शोध, तकनीक और अकादमिक उत्कृष्टता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए।


कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारतीय शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तनकारी पहल बताते हुए बहु-विषयी शिक्षा, कौशल विकास, भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा लचीले शिक्षा पथों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों से भी जोड़ती है।

कार्यक्रम में एचआरडीसी की निदेशक एवं वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय की कार्यवाहक डीन प्रो. (डॉ.) पद्मा मिश्रा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों का अभिनंदन किया तथा एफ.डी.पी.  की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। वहीं, कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. गौरब कुमार शर्मा, सदस्य सचिव एच.आर.डी.सी. एवं एसोसिएट प्रोफेसर, द्वारा किया गया।


पांच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान पाठ्यक्रम डिजाइन एवं विकास, एनईपी एवं NCrF फ्रेमवर्क, अंतर्विषयी शिक्षण एवं अधिगम, शोध नैतिकता, अकादमिक अखंडता एवं प्लेजरिज्म रोकथाम, भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं ऑनलाइन शिक्षण, अनुसंधान हेतु डेटा विश्लेषण, अनुदान लेखन एवं फंडिंग अवसर, बौद्धिक संपदा अधिकार, पेटेंट एवं डिजाइन फाइलिंग, तनाव प्रबंधन, कार्य-जीवन संतुलन एवं कार्य नैतिकता जैसे समकालीन विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए।

इन सत्रों का संचालन विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिनमें प्रो. (डॉ.) प्रभात कुमार, प्रो. (डॉ.) संगीता दयाल, प्रो. (डॉ.) मनोज कपिल, प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा, डॉ. निशा राणा, डॉ. मंजू अधिकारी तथा प्रो. (डॉ.) अणोज राज सहित अनेक विद्वान शामिल रहे। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को नई शिक्षा नीति के व्यावहारिक पक्षों, अनुसंधान की गुणवत्ता तथा डिजिटल शिक्षण पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रतिभागियों की एक आकलन परीक्षा आयोजित की गई, जिसके माध्यम से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का मूल्यांकन किया गया। 


समापन अवसर पर डॉ. गौरब कुमार शर्मा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा, सीईओ प्रो. (डॉ.) शल्या राज, कार्यक्रम निदेशक, सभी संसाधन व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह संकाय विकास कार्यक्रम विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल साबित हुआ, जिसने शिक्षकों को आधुनिक एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

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