नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। जिले की विमलेश देवी निवासी रामनगर ने उच्च न्यायालय में उत्तरप्रदेश सरकार से पारिवारिक पेंशन बंद किये जाने के संयुक्त सचिव सैनिक कल्याण अनुभाग उत्तर प्रदेश शासन व जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेरठ के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी।याची विमलेश देवी की तरफ से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायमूर्ति प्रकाश पड़िया के समक्ष बहस में बताया कि याची के पति सतीश कुमार वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय और रक्षक के दौरान कारगिल में शहीद हो गए थे।
याची के कोई बच्चा नही हुआ था। सरकार ने याची के पति को सेना मेडल से भी सम्मानित किया था ।तत्पश्चात याची को पेंशन दिए जाने के आदेश में ही उसी परिवार में पुनर्विवाह किये जाने पर समस्त सुविधाओ का लाभ मिलने की बात पेंशन प्रपत्र में कही गई थी । समाज व आर्मी के अधिकारियों की मौजूदगी में याची ने अपने शहीद पति के सगे भाई (देवर) शिवकुमार से करेवा विवाह (पुनर्विवाह )भी किया जिसका सर्टिफिकेट 9-2-2020 को आर्मी ने जारी किया और आर्मी ने दूसरे पति को भी भर्ती वर्ष 2000 में ट्रेनिंग में ले लिया था लेकिन ट्रेनिंग के दौरान ही दूसरे पति(देवर) ने आर्मी को छोड़ दिया।
याची अधिवक्ता सुनील चौधरी ने आगे बहस में बताया कि पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट परमजीत कौर केस का हवाला देते हुए बताया कि यदि कोई महिला के पति की मृत्य होने पर अपने ही परिवार में करेवा विवाह(पुनर्विवाह) कर लेती है तो उसकी पारिवारिक पेंशन नही रोकी जा सकती । जबकि सैनिक कल्याण अनुभाग ,उत्तरप्रदेश शासन ने पुनर्विवाह करने के आधार पर याची की पेंशन रोक दी गई। जबकि परिवार में ही करेवा विवाह करना आर्मी के रूल्स के तहत मान्य है जिस पर केंद्र व राज्य सरकार सारी सुबिधाये शहीद की पत्नी को देगी ।केंद्र सरकार याची को परिवारिक पेंशन दे रही है जबकि राज्य सरकार ने पुनर्विवाह करने पर पेंशन पर रोक लगा दी ।जिस पर उच्च न्यायालय ने राज्यसरकार से 6 हफ्ते में जवाब तलब किया है।

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