नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। ज्ञान, शोध, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को समर्पित, स्वामी विवेकानंद शोध पीठ, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के लिए यह अत्यंत गौरवपूर्ण, ऐतिहासिक और प्रेरणादायी क्षण है कि स्वामी विवेकानंद शोध पीठ को उसकी बहुप्रशंसित पुस्तक “कोर वैल्यूज ऑफ़ स्वामी विवेकानंद फिलॉसफी” का पहला कॉपीराइट प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय परिवार के लिए सम्मान का विषय है, बल्कि शिक्षा, शोध, भारतीय दर्शन एवं आध्यात्मिक मूल्यों के क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। यह कॉपीराइट शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध के प्रति प्रतिबद्धता और भारतीय विचारधारा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रतीक है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि को शिक्षा जगत में एक नई दिशा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति एवं दर्शन पर आधारित शोध कार्य आज वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं।
“कोर वैल्यूज ऑफ़ स्वामी विवेकानंद फिलॉसफी” पुस्तक में स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायी विचारों, उनके आदर्शों, नैतिक मूल्यों, मानव सेवा, राष्ट्र निर्माण, युवा चेतना एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण को आधुनिक संदर्भों के साथ अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं, शोधार्थियों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी। पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देते हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में स्वामी विवेकानंद शोध पीठ की प्रोफेसर एवं संयोजिका प्रो.(डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, अथक परिश्रम, समर्पण और अकादमिक दृष्टिकोण के माध्यम से इस कार्य को सफल बनाया। उनके मार्गदर्शन में शोध पीठ लगातार शिक्षा, शोध और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार हेतु महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उनकी इस उपलब्धि की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे अत्यंत प्रेरणादायी बताया।
प्रो.(डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल एक पुस्तक के कॉपीराइट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वामी विवेकानंद के महान विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज में नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है, ऐसे में स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा,“स्वामी विवेकानंद के आदर्श आज भी संपूर्ण मानवता को आत्मविश्वास, सेवा, राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिकता और मानव कल्याण का संदेश देते हैं। हमें उनके विचारों से प्रेरणा लेकर शिक्षा, अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। यह उपलब्धि हम सभी को और अधिक समर्पण, निष्ठा और सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती है।”
प्रो.(डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, शोधार्थियों, सहयोगियों एवं शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग, समर्थन और प्रोत्साहन के बिना यह कार्य संभव नहीं हो पाता।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी महोदया प्रो.(डॉ.) शल्या राज, रजिस्ट्रार महोदय जी.पी. कैप्टन एम. याकूब सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शोध संस्कृति, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रमाण है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी कहा कि आने वाले समय में शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में और अधिक महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे तथा स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानमालाओं और शोध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
यह उपलब्धि इस बात का संदेश देती है कि यदि किसी कार्य को समर्पण, निरंतर प्रयास, सकारात्मक दृष्टिकोण और दृढ़ संकल्प के साथ किया जाए, तो सफलता अवश्य प्राप्त होती है। स्वामी विवेकानंद शोध पीठ की यह सफलता शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नए उत्साह का संचार करने वाली सिद्ध होगी।
निस्संदेह, “कोर वैल्यूज ऑफ़ स्वामी विवेकानंद'स फिलॉसफी” पुस्तक का कॉपीराइट प्राप्त होना केवल एक अकादमिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायी विचारों को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण कदम है।

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