नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। कथाव्यास प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी ने मयूर विहार में अपने आवास पर सामवेद की षष्ठ कथा में सामवेद के मन्त्रों के रहस्यों को उद्घाटित किया।
आज की कथा प्रश्नप्रधानप्रसंग वाली रही। इरिम्बिठी ऋषि ने प्रश्न किये। ये तृप्तिदायक पदार्थ किसके लिए हैं? सभी पदार्थ तभी उपयोगी हैं जब कोई उनका आस्वादन करने वाला हो। इन्द्र हमारे लिए, सारे संसार के लिए, लोकों के लिए रक्षक हैं। इन्द्र को भोग लगा कर सोम का पान करना चाहिए। सोम लता का रस नहीं, इन्द्रियों का स्राव नहीं अपितु जो पूरे संसार का कल्याण करने वाला है। हमारी दृष्टि से मृत्यु कष्टप्रद है किन्तु सोम मृत्यु के माध्यम से पुनर्जन्म के मार्ग को खोलता है। मघवान् वृद्धि करने वाला है। अग्नि जातवेदा है। यदि अपने गतजन्म,पुनर्जन्म को जानना है तो अपनी अग्नि को जान लो। सारे देवता अपने शरीर में विद्यमान हैं। इन्द्र हमारी आत्मा, जीव, ब्रह्माण्ड का स्वामी है। कर्म इन्द्रवाहा है, इन्द्र का घोड़ा है। जीव इसी पर सवार होता है। कर्म नित्य युवा है।

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