मेरठ। मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में चिकित्सा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। विभाग के चिकित्सकों ने एक 45 वर्षीय महिला विमला (बदला हुआ नाम) निवासी मेरठ की लेप्रोस्कोपिक विधि (दूरबीन विधि) से बच्चेदानी का सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन प्रदान किया है।
पीड़ित महिला पिछले काफ़ी समय से अत्यधिक रक्त स्राव तथा असहनीय दर्द से जूझ रही थी तत्पश्चात् उन्होंने मेडिकल कॉलेज मेरठ में संपर्क किया जिसमें जाँच के बाद पता चला कि वह एडिनोमायोसिस (Adenomyosis) नामक बीमारी से ग्रसित है। डॉ शकुन सिंह ने बताया कि एडेनोमायोसिस गर्भाशय (बच्चेदानी) से जुड़ी एक आम स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की आंतरिक परत (endometrial tissue) गर्भाशय की मांसपेशियों वाली दीवार (myometrium) के भीतर बढ़ने लगती है। इस बीमारी में, गर्भाशय की परत के ऊतक मांसपेशियों में घुस जाते हैं, जिससे गर्भाशय सामान्य से 2-3 गुना बड़ा, मोटा या सूजा हुआ हो जाता है। इसे अक्सर मेडिकल भाषा में 'बल्की यूट्रस' (Bulky Uterus) कहा जाता है।
आधुनिक तकनीक का उपयोग
मरीज़ की स्तिथि को देखते हुए चिकित्सकों ने पारंपरिक चीरे वाली सर्जरी के बजाय आधुनिक दूरबीन विधि (Total Laparoscopic Hysterectomy)को चुना। यह तकनीक मरीज़ के लिए कम दर्दनाक होती है क्योंकि एक छोटा सा चीरा लगाना पड़ता है और इसमें रिकवरी बहुत तेजी से होती है उक्त जटिल सर्जरी 22 अप्रैल 2020 को डॉक्टरों की एक कुशल टीम द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिसमें डॉ शगुन सिंह,आचार्य एवं विभागाध्यक्ष स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, डॉ धीरज बालियान,आचार्य, सर्जरी विभाग, डॉ अनुराधा मिश्रा, डॉ सोनम गुप्ता,डॉ साक्षी व एनेस्थीसिया विभाग से डॉ श्वेता सिंह और डॉ सुधीर का भी योगदान रहा।
ऑपरेशन के अगले दिन मरीज़ पूरी तरह स्वस्थ पायी गई,जिसके बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। उक्त सर्जरी के लिए प्राइवेट चिकित्सालयों में लगभग 1-1.5 लाख रुपए लगते है जबकि मेडिकल कॉलेज मेरठ में यह सर्जरी सरकारी दरो पर लगभग फ्री में हो जाती है। मेडिकल कॉलेज की इस उपलब्धि से क्षेत्र के मरीज़ों में आधुनिक और सुलभ इलाज के लिए इलाज के प्रति विश्वास बढ़ा है। प्राचार्य डॉ आर सी गुप्ता ने जटिल सर्जरी में शामिल टीम को बधाई दी।

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