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Wednesday, April 15, 2026

जड़ौदा में मौलाना अब्दुल मालिक मुगीसी के स्वागत में भव्य कार्यक्रम आयोजित



इकराम चौधरी 

नित्य संदेश, मेरठ। जड़ौदा स्थित मदरसा अहसनुल उलूम में हज़रत मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी के जानशीन और साहिबज़ादा, जामिया गुलज़ार हुसैनिया अजराड़ा के मोहतमिम हज़रत मौलाना अब्दुल मालिक मुगीसी की आमद के मौके पर एक भव्य स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और आसपास के इलाकों से आए मुहिब्बीन ने शिरकत की।

अपने खिताब में मौलाना अब्दुल मालिक मुगीसी ने कहा कि इंसान को अपनी ज़बान और दिल को हर वक्त अल्लाह के ज़िक्र से महकाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए दवाइयों का इस्तेमाल जरूरी है, उसी तरह रूहानी बीमारियों से दिल को पाक रखने के लिए अल्लाह का ज़िक्र बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें इस्लामी तालीमात को पूरी तरह अपनी ज़िंदगी का दस्तूर-ए-अमल बनाना चाहिए। जामिया गुलज़ार हुसैनिया अजराड़ा के शेखुल हदीस मौलाना अकील अहमद कासमी ने कहा कि मौत एक ऐसी हकीकत है जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि मोमिन के लिए मौत अल्लाह की तरफ से एक बेहतर चीज है, लेकिन अपनों की जुदाई इंसान को गमगीन कर देती है। मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी के इंतकाल पर गहरा दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी हमें यह पैगाम देती है कि दीन और दुनिया दोनों तरह की तालीम को आम किया जाए। मौलाना आस मोहम्मद गुलज़ार कासमी ने अपने खिताब में कहा कि मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी ने जिस तरह खालिस नीयत के साथ कौम व मिल्लत की खिदमत की, हमें भी उनके नक्श-ए-कदम पर चलते हुए इसी जज़्बे के साथ समाज की सेवा करनी चाहिए।

इस मौके पर स्थानीय विधायक शाहिद मंज़ूर ने तालीम की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि जिस कौम में शिक्षा का प्रसार होता है, वही तरक्की करती है, और जो कौम शिक्षा से दूर रहती है, वह गुलामी की जिंदगी जीने पर मजबूर हो जाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया और आखिरत दोनों की भलाई के लिए दीन और दुनियावी तालीम को अपनी जिंदगी का मिशन बनाना होगा। कार्यक्रम के अंत में जामिया के मोहतमिम मौलाना इक़बाल कासमी ने मौलाना अब्दुल मालिक मुगीसी को मोहतमिम बनने पर बधाई दी। कार्यक्रम की नज़ामत मौलाना अनीसुर्रहमान कासमी ने की।

इस मौके पर कारी जाफर, कारी मारूफ, कारी उमीद, हाजी ज़फर, हाजी वकील, कारी कफील, मौलाना मुईन, मौलाना सनोबर, कारी रिहान, हाफिज आदिल, कारी जर्रार, हाजी मुराद अली, कारी ज़व्वार, हाफिज मेराज, प्रधान जी सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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